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UP Politics: हिन्दुवादी नेता बोले- शिखा काटने का काम तो औरंगजेब शासन में होता था, सीएम से कार्रवाई की मांग

Fri, 23 Jan 2026 10:36 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 23 Jan 2026 10:36 AM IST
सार

UP News: विश्व हिन्दू सेना प्रमुख अरुण पाठक ने बटुक, ब्राह्मणों का शिखा उखाड़ने के मामले को निंदनीय बताया कि है। कहा कि सूबे के मुखिया योगी को जानकारी नहीं है, इसलिए लगता है कि अब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।

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Hindu leader says cutting off person hair practice during Aurangzeb rule demands action from Chief Minister
अरुण पाठक ने की सीएम योगी से कार्रवाई की मांग। - फोटो : संवाद

विस्तार

शिखा काटना औरंगजेब के शासन में होता था। वे लोग तिलक चाटते और शिखा काटते थे। इसे खत्म करने के लिए क्षत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज का आंदोलन चलाया था। उक्त बातें अखिल भारत हिन्दू महासभा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष और विश्व हिन्दू सेना प्रमुख अरुण पाठक व्यक्त किए।

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उन्होंने कहा कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने विधर्मियों का सर्वनाश जरूर किया है लेकिन उनके शासन काल में बटुक, ब्राह्मणों का शिखा उखाड़ना निंदनीय है। पुलिस प्रशासन में ऐसे लोग हैं, और औरंगजेब के हुकूमत से इंस्पायर हैं। उन्होंने कहा की जिस तरह से बिना सुन्नत के मुसलमान नहीं उसी प्रकार बिना सिखा के हिन्दू होने का अधिकार नहीं वो सिर्फ सिखा नहीं वो हिंदुत्व की पहचान है सीएम योगी को थाने में हुए निंदनीय अपराध की जानकारी शायद नहीं है, यही कारण है कि अभी तक दोषियों को सजा नहीं मिल पाई। कार्रवाई के लिए सनातनधर्म के लोग व्याकुल हैं।
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प्रयागराज में बटुकों और ब्राह्मणों के साथ अभद्रता, शिखा उखाड़ने की घटना निंदनीय है। प्रयागराज में बटुकों और ब्राह्मणों की शिखा उखाड़ने की कथित घटना को लेकर प्रदेशभर में रह रहे विश्व हिन्दू सेना के कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया है। सनातन परंपरा में शिखा केवल केश नहीं, बल्कि आस्था, संस्कार और पहचान का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इस तरह की घटना को सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं पर आघात है।

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कार्रवाई की मांग

हिन्दुवादी नेता ने कहा कि घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस मामले में अब तक जिम्मेदार पुलिसकर्मी पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि अगर इस मामले की सही जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच जाती, तो अब तक संबंधित पुलिसकर्मी पर सख्त कदम उठाया जा चुका होता। 

अरुण पाठक ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर मामले को दबाने या हल्का दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिससे पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिल पा रहा है। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त मानी जाती है, लेकिन इस घटना में कार्रवाई में हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य वर्ग या समुदाय के साथ इस तरह की घटना होती, तो तत्काल कार्रवाई देखने को मिलती। ऐसे में यह दोहरे मापदंड जैसा प्रतीत हो रहा है।

हिन्दुवादी नेता का यह भी कहना है कि पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है, न कि किसी की धार्मिक पहचान का अपमान करना। शिखा उखाड़ने जैसी घटना न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि पूरे समाज को ठेस पहुंचाने वाली है। अब सभी की निगाहें प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और दोषियों के खिलाफ कब तक कड़ी कार्रवाई करती है।

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