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इंटरनेट पर तेजी से पढ़ी जाने वाली भाषा है हिंदी : निदेशक
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केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा आयोजित राजभाषा
- फोटो : credit
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में राजभाषा सप्ताह समारोह का सोमवार को उद्घाटन हुआ। इस दौरान आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो.एसएन संखवार, नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल सहित अन्य लोगों ने हिंदी की बढ़ती ताकत आदि से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि प्रो.एसएन संखवार ने कहा कि वर्तमान समय में इंटरनेट पर हिंदी तेजी से पढ़ी जाने वाली भाषा है।
संस्थान के आतिश सभागार में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से हुए समारोह में आईएमएस निदेशक ने कहा कि गूगल, यूट्यूब, व्हाट्सएप पर हिंदी सामग्री ने गांव और शहर, शिक्षित और कम-शिक्षित के बीच की डिजिटल खाई को पाटा है। इसकी महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हिंदी एक समावेशी भाषा है जिसमें सब कुछ समेट लेने की क्षमता है। जो भाषा जितनी विनम्र होगी वही मजबूत बनेगी। हिंदी में यह स्वभाव सांस्कृतिक रूप से सदैव रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी हिंदी भाषा भारतीय ज्ञान मीमांसा की भाषा नहीं बनेगी तब तक सर्वांगीण विकास का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि हम अपनी भाषा से जितना प्रेम करेंगे उतनी ही भाषा मजबूत बनेगी। भाषा भाव की विषयवस्तु है। वह हमारी मां है। हिंदी ने भारत को केवल शब्द नहीं दिए, उसने हमें एक साझा पहचान दी है। विषय प्रवर्तन डॉ. उमेश प्रसाद सिंह, संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी ने किया। स्वागत उपकुलसचिव डॉ. हिमांशु पाण्डेय, धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया। इस दौरान प्रो.रामसुधार सिंह, राजेश मिश्र, सुनील कुमार, डॉ.रविरंजन द्विवेदी, टीआर शासनी, डॉ जम्पा सामतेन मौजूद रहे।
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संस्थान के आतिश सभागार में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से हुए समारोह में आईएमएस निदेशक ने कहा कि गूगल, यूट्यूब, व्हाट्सएप पर हिंदी सामग्री ने गांव और शहर, शिक्षित और कम-शिक्षित के बीच की डिजिटल खाई को पाटा है। इसकी महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हिंदी एक समावेशी भाषा है जिसमें सब कुछ समेट लेने की क्षमता है। जो भाषा जितनी विनम्र होगी वही मजबूत बनेगी। हिंदी में यह स्वभाव सांस्कृतिक रूप से सदैव रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी हिंदी भाषा भारतीय ज्ञान मीमांसा की भाषा नहीं बनेगी तब तक सर्वांगीण विकास का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
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अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो वांगचुक दोर्जे नेगी ने कहा कि हम अपनी भाषा से जितना प्रेम करेंगे उतनी ही भाषा मजबूत बनेगी। भाषा भाव की विषयवस्तु है। वह हमारी मां है। हिंदी ने भारत को केवल शब्द नहीं दिए, उसने हमें एक साझा पहचान दी है। विषय प्रवर्तन डॉ. उमेश प्रसाद सिंह, संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी ने किया। स्वागत उपकुलसचिव डॉ. हिमांशु पाण्डेय, धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया। इस दौरान प्रो.रामसुधार सिंह, राजेश मिश्र, सुनील कुमार, डॉ.रविरंजन द्विवेदी, टीआर शासनी, डॉ जम्पा सामतेन मौजूद रहे।
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