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#हिंदीहैंहम: अंतर्मन तक छू जाती है हिंदी काव्य की अभिव्यक्ति

Tue, 25 Aug 2020 03:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 25 Aug 2020 03:42 PM IST
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Hindi Hain Hum: The expression of Hindi poetry touches inner soul
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

भावों को व्यक्त करने की जो सहजता हिंदी में है, वह किसी और भाषा में नहीं मिलती है। हिंदी काव्य हो या साहित्य उसके आनंद और अभिव्यक्ति की भावना हर जन को अंतर्मन तक छू जाती है। देश को एकसूत्र में पिरोने के साथ ही मन के भावों को दूसरों तक पहुंचाने में हिंदी का कोई जोड़ नहीं है। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान से जुड़े और हिंदी को सशक्त करें।

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संस्कारों को जन्म देने का नाम है हिंदी
गीतकार कन्हैया दूबे ने बताया कि हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान, इससे ही भारत उत्थान..। हिंदी भाषा अपने आप में बहुत समृद्ध है। आज भी जितना संस्कार या भाव हिंदी में पाया जाता है और किसी में नहीं। सच कहें तो हिंदी भाषा भाषाओं की जान है। हिंदी को जिस दिन लोग हेय दृष्टि से देखना बंद कर देंगे उस दिन हमारा देश अपने आप में जीता जागता हिंदुस्तान कहा जाएगा। पिछले 20 सालों से हिंदी लोकगीत और भजनों की रचना करते हुए हमेशा मैंने संस्कारों का ध्यान रखा। देवी गीत हो, भोजपुरी हो या लोकगीत हर जगह हिंदी को सर माथे पर रखा है।
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राष्ट्र के माथे की बिंदी है यह हिंदी
यूं तो देश में कई भाषाएं और हैं पर राष्ट्र के माथे की बिंदी है यह हिंदी...। हिंदी देश को भावनात्मक एकता सूत्र में बनाए रखने की अपने आप में क्षमता रखती है। हिंदी एक ऐसी भाषा है जो हमारे देश के लगभग सभी राज्यों में बोली और समझी जाती है। यह एक सरल सहज भाषा है जिसके चलते आज मैं हिंदी भाषा में अपनी कविताएं काफी आसानी से रच पाती हूं। सबसे बड़ी बात हिंदी ऐसी भाषा है जो जैसे लिखी जाती है वैसे बोली भी जाती है और उसी भाव से समझी भी जाती है। पिछले तीन सालों से हिंदी में कई कविताएं लिख चुकी हूं। - प्रेरणा अनमोल, छात्रा

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भारत की समझ है हिंदी
हिंदी भारत की समझ है, जिसमें आमतौर पर हर कोई समझता है। हम जो भी सोचते हैं, विचार करते हैं, उसे मूल रूप से अपनी भाषा में ही कहते हैं। अगर हमें किसी को अपना मंतव्य किसी दूसरे के सामने दूसरी भाषा में रखना होता है तो हम उसे मूल रूप में न बता कर उसे उस भाषा में अनुवाद करके बताते हैं जिससे हमारी मानसिक ऊर्जा खर्च होती है। मुझे जो काम हिंदी में करने में आनंद आता है वो अन्य किसी भाषा में नहीं आता है। यही कारण है कि मैं अपना लगभग सारा काम हिंदी में ही करना पसंद करता हूं। - दिवाकर पांडेय, सामाजिक कार्यकर्ता

हर वर्ग की भावना और अहसास मौजूद है हिंदी में
हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी एक सुंदर और हरा भरा गुलदस्ता है। जिसमें देश और समाज के प्रत्येक वर्ग की भावनाएं एवं एहसास मौजूद है। सामान्य जनमानस की भाषा होने के कारण यह आम लोगों के जीवन एवं उनकी चुनौतियों से बहुत गहरे स्तर पर जुड़ी है। हमारे वर्तमान के संकट की ही नहीं बल्कि इतिहास की कई घटनाएं, दृश्य एवं भयावह अनुभव की यह भाषा साक्षी रही है। इसलिए भारत की वास्तविक तस्वीर को समझना हिंदी के बगैर मुश्किल है। इस भाषा के विकास में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान है। - नेहा परवीन, डीएलएड छात्रा

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