हिंदी दिवस 2023: हिंदी के बन रहे ज्ञाता मगर अफसोस...ककहरा ही नहीं आता, पूर्वांचल के 54% छात्र छात्राएं रहे फेल
विश्व हिंदी दिवस के पूर्व अमर उजाला ने पूर्वांचल के तीन मंडलों के 10 जिलों में हिंदी विषय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे 50 विद्यार्थियों पर सर्वेक्षण किया। विद्यार्थियों से हिंदी वर्णमाला का क से ज्ञ तक 60 सेकेंड में लिखने को कहा गया। इस सर्वेक्षण में 54 फीसदी छात्र-छात्राएं क से ज्ञ तक लिखने में फेल साबित हुए।
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लो फिर आ गया हिंदी दिवस। एक बार फिर हिंदी को राजभाषा से राष्ट्रभाषा तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। फिर हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की कसमें खाई जाएंगी। जिनकी मातृभाषा हिंदी है, उनके लिए एक एक सवाल आज ज्यादा मौजूं हो जाता है। क्या सच में हम हिंदी को लेकर वाकई गंभीर हैं। क्या हमारी युवा पीढ़ी हिंदी की वर्णमाला अच्छी तरह से जानती है। इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए हमने पूर्वांचल में किया एक सर्वेक्षण। इस सर्वेक्षण के परिणाम चौंकाने वाले थे।
इसे हिंदी का दुर्भाग्य कहें या फिर हमारे कान्वेंट एजुकेशन वाली शिक्षा व्यवस्था का अभिशाप। हिंदी विषय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे आधे से ज्यादा विद्यार्थी हिंदी वर्णमाला का ही पूर्ण ज्ञान नहीं रखते। कहने को ये 12वीं उत्तीर्ण और उच्च शिक्षा के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा में पास हैं। हिंदी के ज्ञाता बन रहे हैं। लेकिन हकीकत में हिंदी के ककहरा ज्ञान में फेल हैं। ये सच सामने आया है अमर उजाला के सर्वेक्षण में। विश्व हिंदी दिवस के पूर्व अमर उजाला ने पूर्वांचल के तीन मंडलों के 10 जिलों में हिंदी विषय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे 50 विद्यार्थियों पर सर्वेक्षण किया।
60 सेकेंड में हिंदी वर्णमाला नहीं लिख सके विद्यार्थी
सर्वे में प्रत्येक जिले से 5-5 विद्यार्थियों का शामिल किया गया था। सभी से हिंदी वर्णमाला का क से ज्ञ तक 60 सेकेंड में लिखने का कहा गया। इस सर्वेक्षण में 54 फीसदी छात्र-छात्राएं क से ज्ञ तक लिखने में फेल साबित हुए। सिर्फ 46 फीसदी विद्यार्थी ही इसे सही-सही पूरा लिख सके। जिन्होंने इसे पूरी तरह लिखा, उसमें भी कुछ ऐसे थे जिन्होंने ड और ढ जैसे अक्षर के नीचे बिंदी लगाकर उसे ड़ या ढ़ कर दिया।
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ऐसे हुआ सर्वेक्षण
वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, आजमगढ़, मऊ तथा बलिया जिले में हिंदी विषय में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले पांच-पांच विद्यार्थियों को रेंडम तरीके से चयनित किया गया है। उनसे एक मिनट में हिंदी वर्णमाला का कहकरा यानी क से ज्ञ तक लिखने को कहा गया। ये कार्य 12 तथा 13 सितंबर को किया गया।
सर्वे में ये तथ्य भी आए सामने
- सर्वे में शामिल लगभग आधे लोग क से ज्ञ तक पूरा लिख ही नहीं सके।
- कुछ ने वर्णमाला के क्रम को गलत तरीके से लिखा। प फ ब भ म को पहले लिखा, त थ द ध न को बाद में लिखा।
- बहुत से विद्यार्थी ऐसे भी दे जिन्होंने ड तथा ढ के नीचे बिंदी लगा कर उसे ड़ तथा ढ़ लिख दिया।
- कुछ छात्र-छात्राओं ने क से ज्ञ तक लिखने में एक मिनट की बजाय डेढ़ मिनट से ज्यादा समय लिया।
पूर्वांचल के शिक्षकों की बात
- आज की प्रारंभिक शिक्षण व्यवस्था में अंग्रेजी को वरीयता दी जा रही है। इससे हिंदी भाषा पर छात्रों की पकड़ कमजोर होती जा रही है। - डॉ. सर्वेश पांडेय, प्राचार्य, सवोर्दय पीजी कॉलेज, मऊ
- प्राथमिक स्तर पर ही हिंदी भाषा के पठन पाठक पर ध्यान न देने की वजह से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता की कमी है। - डॉ. सुषमा सिंह, विभागाध्यक्ष-हिंदी, टीडी पीजी कॉलेज, जौनपुर
- आज के दौर हिंदी में न तो सुलेख लिखाया जा रहा है और न आलेख लिखाया जाता है। इससे बच्चों की हिंदी कुछ कमजोर हो रही है। - डॉ. उर्मिला मौर्या, विभागाध्यक्ष-हिंदी, कमला आर्य कन्या पीजी कॉलेज, मिर्जापुर
- वर्तमान में बच्चों की नींव ही कच्ची है। वे मात्रा नहीं जानते, वे बहुत अच्छे से पढ़ नहीं पाते हैं। बच्चों के साथ-साथ समाज भी हिंदी के प्रति जागरूक नहीं है। -प्रो. इशरत जहां, विभागाध्यक्ष-हिंदी, लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज, पीडीडीयू नगर, चंदौली
- अभिभावकों को इस बात का गर्व होता है कि मेरा बच्चा अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहा है। भले बच्चा हिंदी में पीछे जा रहा है। अंग्रेजी अच्छी होगी, इसकी भी गारंटी नहीं। -प्रो. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री, प्राचार्य, हिंदू पीजी कॉलेज जमनिया, गाजीपुर
- बेसिक शिक्षा से ही भाषा का शुद्ध ज्ञान न होने के कारण बच्चों में हिंदी भाषा की कमजोरी देखने को मिल रही है। मोबाइल ने भी हिंदी भाषा का बंटाधार किया है।- डॉ. किरण शर्मा, विभागाध्यक्ष-हिंदी, काशी नरेश राजकीय पीजी कॉलेज, ज्ञानपुर, भदोही
- अंग्रेजी को रोजगारपरक और संवाद की अंतरराष्ट्रीय भाषा माने जाने के कारण हिंदी के प्रति युवाओं का रुझान कम हुआ है। इससे उनकी भाषा पर पकड़ कमजोरी हुई है। - डॉ. मालती देवी, विभागाध्यक्ष-हिंदी, भाऊराव देवरस पीजी कॉलेज दुद्धी, सोनभद्र