बनारस में बनेगी UP की सबसे ऊंची फ्लैटेड फैक्टरी: साड़ी और खिलौना उद्योग को मिलेगी संजीवनी, होंगे ये फायदे
वाराणसी में 13 मंजिल की फ्लैटेड फैक्टरी के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। वाराणसी में इसके लिए करीब एक वर्ष पहले योजना बनाई थी, मगर जमीन चिह्नित नहीं होने के कारण इसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका है।
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कानपुर और आगरा के बाद अब वाराणसी में सबसे ऊंची फ्लैटेड फैक्टरी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें अलग अलग फ्लोर को काम के हिसाब से तैयार किया जाएगा। इसके लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही शासन को इसका प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। फिलहाल स्थानीय स्तर पर 13 मंजिल की फ्लैटेड फैक्टरी के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए चांदपुर औद्योगिक आस्थान में जमीन चिह्नित किया गया था। मगर, तकनीकी कारणों से दूसरी जमीन के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
दरअसल, वाराणसी के तीन औद्योगिक क्षेत्र रामनगर, करखियांव और चांदपुर में फ्लैटेड फैक्टरी के लिए जमीन तलाशी जा रही है। वाराणसी में इसके लिए करीब एक वर्ष पहले योजना बनाई थी, मगर जमीन चिह्नित नहीं होने के कारण इसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका है।
50 से ज्यादा इकाइयां एक ही भवन में होंगी शिफ्ट
वाराणसी में साड़ी कारोबार के पावरलूम और खिलौना उद्योग के लिए फ्लैटेड फैक्टरी को मुफीद माना जा रहा है। यही कारण है कि बहुमंजिला इमारत के जरिए इस तरह की करीब 50 से ज्यादा इकाइयों को एक ही भवन में शिफ्ट किया जाएगा। अगर यह योजना सफल हुई तो भूमि आवंटन की बजाय फ्लैटेड फैक्टरी को ही बढ़ावा दिया जाएगा।
फ्लैटेड फैक्टरी के तहत फ्लैटनुमा बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाता है। इमारत के हर फ्लोर पर काम के हिसाब से स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है। बनारसी साड़ी के लिए हैंडलूम व पावरलूम, रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक-इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, हैंडीक्राफ्ट, फैशन डिजाइन सहित अन्य उद्योगों को यहां संचालित किया जा सकता है।
रिंग रोड किनारे भी तलाशी जा रही है जमीन
महायोजना 2031 में रिंग रोड पर औद्योगिक गतिविधियों की उम्मीद के साथ ही यहां भी फ्लैटेड फैक्टरी के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो रिंग रोड-2 के किनारे फ्लैटेड फैक्टरी के लिए अलग-अलग भूखंड चिह्नित करने के लिए उद्योग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि फ्लैटेड फैक्टरी के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके बाद शासन को प्रस्ताव भेजकर मंजूरी मांगी जाएगी।
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