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फर्जी नियुक्तियों पर दो माह में निर्णय लें बीएचयू कुलपति : हाईकोर्ट

Thu, 05 Jul 2018 02:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी/इलाहाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी/इलाहाबाद Updated Thu, 05 Jul 2018 02:28 PM IST
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Highcourt says that BHU vice chancellor take action against fake joining
बनारस हिंदू विश्वविद्यालयों में फर्जी नियुक्तियों को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने मामला कुलपति के पास भेज दिया है। कुलपति से कहा है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार दो माह में निर्णय लें। व्यंकटेश सिंह, डॉ. अंगद कुमार सिंह और डॉ. राजीव प्रताप सिंह की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति इफाकत अली खान ने सुनवाई की।
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बीएचयू के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह का कहना था कि याचिका में उठाई गईं आपत्तियां कुलपति की जानकारी में पहले से ही हैं और वह उन पर विचार कर रहे हैं। यदि याचीगण याचिका में उठाए गए वैधानिक पहलुओं को कुलपति के समक्ष उठाते हैं तो कुलपति उस पर भी विचार करने को तैयार हैं।
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बीएचयू के अधिवक्ता के इस आश्वासन के बाद कोर्ट ने याचिकाएं यह कहते हुए निस्तारित कर दीं कि याचीगण अपना प्रत्यावेदन कुलपति को दें, जिसमें वह सभी मुद्दों को उठा सकते हैं। कुलपति को निर्देश दिया है कि वह याचीगण के प्रत्यावेदन पर दो माह में उपयुक्त निर्णय लें। 
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कोर्ट का कहना था कि चूंकि कुलपति पहले से इस मामले को देख रहे हैं, इसलिए इस पर भी विचार करें। याचिका में पूर्व कुलपति जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि उन नियुक्तियों में योग्यता की अनदेखी की गई और मनमाने तरीके से कम योग्यता वाले लोगों का चयन कर लिया गया।

पहले ही हो चुकी है नियुक्तियों में अनियमितताओं की पुष्टि

Highcourt says that BHU vice chancellor take action against fake joining
बीएचयू में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर के पदों पर नियुक्तियों में अनियमितताओं के मामले में अब कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अलग-अलग दायर तीन याचिकाओं को संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मामले में कुलपति को दो महीने में फैसला लेने का आदेश दिया है।

इधर, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईएमएस), विज्ञान संस्थान सहित अन्य संस्थानों और संकायों में नियुक्त शिक्षकों में फैसले के बाद खलबली मच गई है। आईएमएस, कला संकाय, विज्ञान संस्थान सहित अन्य संस्थानों में हुई 200 नियुक्तियों को लेकर 50 से अधिक आरटीआई, 30 से अधिक याचिकाएं दायर करने के साथ ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्य जगहों पर शिकायत कर जांच की मांग की गई थी। सबसे अधिक मामले विज्ञान संस्थान के हैं।

आरटीआई के जवाब से ही एक-एक कर संकायवार नियुक्ति में अनियमितता के मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिर इफाकत अली खान ने 28 मई को दिए गए आदेश की कॉपी बुधवार को अपलोड हो गई। 

तीन अलग-अलग याचिकाओं में रोस्टर का पालन न करने के साथ ही के साथ ही विज्ञान संकाय में हुई नियुक्तियों सहित अन्य संकायों में नियुक्तियों को चुनौती दी गई थी। इससे पहले आरटीआई के जवाब में भी कहीं कागजातों की हेराफेरी तो कहीं एपीआई नंबर कम होने, आधे अधूरे प्रमाण पत्र होने, जरूरी अर्हताएं न होने का खुलासा हो चुका है। 

कार्रवाई के लिए कुलपति से मिलेंगे याचिका कर्ता

Highcourt says that BHU vice chancellor take action against fake joining
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब याचिका दायर करने वाले कुलपति से मिलने की तैयारी कर रहे हैं। शुक्रवार को एक प्रतिनिधिमंडल कोर्ट के आदेश की प्रति के साथ कुलपति से मिलकर कार्रवाई की मांग करेगा। इसमें विज्ञान संस्थान के निदेशक की जांच रिपोर्ट सहित आरटीआई के माध्यम से हुई अनियमितताओं की पुष्टि से जुड़े कागजात कुलपति को दिए जाएंगे। नियुक्तियों के मामले में अलग-अलग विभागों से जुड़े मामलों में 100 से अधिक लोगों ने आरटीआई लगाई है। प्रो. त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब विश्वविद्यालय की ओर से सभी को एक-एक कर जवाब दिया जा रहा है। 


विज्ञान संस्थान के सबसे ज्यादा मामले   
प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों में सबसे अधिक अनियमितता के मामले विज्ञान संस्थान से जुड़े हैं। दर्जन भर शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने निदश्ेाक से इसकी जांच कराई थी। निदेशक ने जियोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, केमिस्ट्री, जूलॉजी, फिजिक्स, सांख्यिकी, बॉटनी में हुई नियुक्तियों पर शिकायतों की जांच कर फरवरी में रिपोर्ट सौंप दी थी। इसमें उन्होंने नियमों की अनदेखी, कागजों की हेराफेरी के साथ ही चयन प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाने के साथ ही बरकछा कैंपस में हुई नियुक्तियों का भी जिक्र किया था।

आरटीआई में इन अनियमितताओं का हुआ खुलासा
-  बिना कार्यकारिणी परिषद के मुहर के दे दिया गया नियुक्ति पत्र 
- आधे-अधूरे प्रमाणपत्रों और कागजातों में हेराफेरी के बावजूद नियुक्ति 
- नियुक्ति के लिए जरूरी अर्हताएं भी नहीं हुई पूरी 
-  एपीआई में मिलने वाले नंबरों में भी हुआ खेल
- पब्लिक ग्रीवांस सेल में हुई शिकायतों का गोलमोल जवाब
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