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Varanasi News: ईसी पर हाईकोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से मांगा 5 दिसंबर तक जवाब

Tue, 12 Nov 2024 12:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2024 12:33 AM IST
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High Court seeks reply from Education Ministry on EC by December 5
बीएचयू की दलील- मंत्रालय ने नहीं किया पत्र का पालन
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माई सिटी रिपोर्टर
प्रयागराज/वाराणसी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) कार्यकारिणी परिषद के गठन को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। अभी तक शिक्षा मंत्रालय की ओर से क्या कार्रवाई की गई है, उसे भी बताना है। अगली सुनवाई के लिए 5 दिसंबर की तिथि नियत की गई है। अब इसकी फ्रेश याचिका के तौर पर सुनवाई होगी।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली व विकास बुधवार की खंडपीठ ने अधिवक्ता हरिकेश बहादुर की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याची के वकील एचएन सिंह ने दलील दी कि रजिस्ट्रार ने शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था कि बीएचयू में कार्यकारिणी परिषद 2021 से नहीं है। इसके बाद भी शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक परिषद का गठन नहीं किया है। वहीं, बीएचयू एक्ट के 7सी (5) नियम का भी हवाला दिया गया था कि कुलपति बिना ईसी के कोई फैसला लेते हैं तो अगली बैठक में इन सभी फैसलों को अनुमोदन दिलाना होगा। जो कि बीते तीन साल से नहीं हुआ।
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कुलपति ही ले रहे सारे फैसले
याचिका के अनुसार, कार्यकारिणी को ही विश्वविद्यालय के लिए नियम बनाने, वित्तीय व नियुक्ति व अन्य मामलों में फैसला लेने का अधिकार है। नियुक्तियों की स्वीकृति भी कार्यकारिणी ही करेगी। कार्यकारिणी के न होने से कुलपति ही सारे फैसले ले रहे हैं। यह नियमानुसार ठीक नहीं है। इस पर बीएचयू के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। खंडपीठ ने बीएचयू के वकील से कहा कि सूचना प्राप्त करें कि ऐसा क्यों हो रहा है। अगली तिथि तक जवाब दाखिल करें।
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शिकायत पर क्या कार्रवाई ये भी बताएं
याची हरिकेश बहादुर ने कहा कि याचिका से पहले राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्री को इसी मामले में शिकायत पत्र भेजा था। कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से इसका भी जवाब मांगा है कि अब तक शिकायत पर क्या-क्या कार्रवाई की गई। हरिकेश बहादुर का आरोप है कि कुलपति जानबूझकर कार्यकारिणी का गठन नहीं होने देना चाह रहे हैं। इसके चलते विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार कर गलत नियुक्तियां की जा रही हैं।
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