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बीएचयू में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को चुनौती, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Sun, 14 Oct 2018 02:52 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Sun, 14 Oct 2018 02:52 PM IST
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High court has asked for response to petition challenging assistant professor recruitment in BHU
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका पर बीएचयू, केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा है।
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साथ इस याचिका को इसी मामले में पहले से लंबित डा. प्रियंका सिंह की याचिका से संबद्ध करते हुए एक साथ सुनवाई का निर्देश दिया है। डा. ओमप्रकाश और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एसडी सिंह सुनवाई कर रहे हैं।
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इससे पूर्व दाखिल डा. प्रियंका सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2017 को सभी पक्षों से जवाब मांगते हुए कहा था कि विज्ञापन संख्या 1/2017-2018 के परिप्रेक्ष्य में होने वाली भर्तियां इस याचिका पर होने वाले अग्रिम आदेशों पर निर्भर करेंगी।
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डा. ओमप्रकाश की याचिका को भी कोर्ट ने इसी निर्देश के साथ डा. प्रियंका की याचिका से संबद्ध कर दिया है मगर इससे पूर्व सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह की मोहलत दी है।

याचिका पर इसके बाद सुनवाई होगी। याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि सहायक प्रोफेसर भर्ती में योग्य उम्मीदवारों की अनदेखी कर उनसे कम योग्यता वालों को नियुक्ति दी जा रही है।

नए आदेश ने बढ़ाई धुकधुकी 

High court has asked for response to petition challenging assistant professor recruitment in BHU
बीएचयू
बीएचयू में शिक्षकों की नियुक्ति में अनियमितता के मामले में हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद नियुक्त शिक्षकों की धुकधुकी एक बार फिर बढ़ गई है। कोर्ट ने कहा है कि विज्ञापन संख्या 1/2017-2018 के परिप्रेक्ष्य में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्तियों पर अंतिम फैसला संबंधित याचिका पर होने वाले अग्रिम आदेशों पर निर्भर करेगी। 

बीएचयू के विज्ञान संकाय, महिला महाविद्यालय, आईएमएस समेत अन्य विभागों में ऐसे 100 शिक्षक हैं, जो इसके दायरे में आ रहे हैं। सूत्रों की माने तो कोर्ट के इस आदेश के बाद अब संबंधित शिक्षकों के स्थायीकरण सहित अन्य प्रक्रिया में देरी होने की संभावना है।

विश्वविद्यालय में पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर पद पर विभिन्न संकायों में 215 नियुक्तियां हुई थीं। इन नियुक्तियों पर सवाल खड़ा करते हुए आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी। विश्वविद्यालय ने जो आरटीआई में जवाब दिया उससे बड़े पैमाने पर अनियमितता का खुलासा हुआ था।

इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियुक्तियों को चुनौती दी गई, जिसमें कोर्ट ने गत 28 मई को एक आदेश जारी कर याचीकर्ताओं को कुलपति के पास जाकर प्रत्यावेदन देने और प्रत्यावेदन मिलने से दो माह के भीतर कुलपति को निर्णय लेने का आदेश भी पारित किया था।

मामले में याचिकाकर्ताओं ने 16 जुलाई को कुलपति को प्रत्यावेदन दिया और कोर्ट की ओर से निस्तारण की नियत तिथि 15 सितंबर को बीत गई लेकिन निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद कुलपति ने कोर्ट से और समय मांगा। इस बीच 12 अक्तूबर को असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर जारी आदेश के बाद विभागों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। 
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