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BHU Research: अब कम हो जाएंगे हार्ट अटैक के मामले! वरदान साबित हो रही 'हृदय महाकषाय औषधि' आखिर क्या है ?

Fri, 16 Dec 2022 11:18 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 16 Dec 2022 11:18 AM IST
सार

बीएचयू हृदय रोग विभाग में रोज दिल की बीमारी वाले मरीज इलाज के लिए आते हैं। बीमारी पर नियंत्रण के उद्देश्य से आयुर्वेद संकाय और आईएमएस बीएचयू के चिकित्सकों की ओर से शोध किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट आफ एमिनेंस के तहत हृदय महाकषाय औषधि के प्रभाव का मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। 

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Heart astringent drug proving boon in the treatment of heart attack Medicine made in BHU Ayurveda Faculty
हार्ट अटैक - फोटो : istock

विस्तार

हृदय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले यह बीमारी 50 साल से कम उम्र वालों की मानी जाती थी, लेकिन अब इसकी जद में युवा ही नहीं बल्कि किशोर भी आ रहे हैं। आए दिन लोग हार्ट फेल होने से मौत के मुंह में जा रहे हैं। कोई दिल में छेद तो कोई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से परेशान है। ऐसे मरीजों के लिए बीएचयू आयुर्वेद संकाय में तैयार की गई हृदय महाकषाय औषधि वरदान साबित हो रही है। मरीजों को यह निशुल्क देने के साथ ही उनकी निगरानी भी की जा रही है। हार्ट अटैक से पीड़ित लोगों के लिए यह ज्यादा लाभप्रद है। 

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बीएचयू हृदय रोग विभाग में रोज दिल की बीमारी वाले मरीज इलाज के लिए आते हैं। बीमारी पर नियंत्रण के उद्देश्य से आयुर्वेद संकाय और आईएमएस बीएचयू के चिकित्सकों की ओर से शोध किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट आफ एमिनेंस के तहत हृदय महाकषाय औषधि के प्रभाव का मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। 
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शोध परियोजना के मुख्य अन्वेषक और क्रिया शारीर विभाग के वैद्य सुशील कुमार दूबे ने बताया कि हृदय महाकषाय को लेकर संस्थान स्तर पर इंस्टीट्यूट एथिकल समिति और क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में भी रजिस्टर किया जा चुका है। संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी के निर्देशन में हुए शोध कार्य में हृदय रोग विभाग से डॉ. सुयश त्रिपाठी और डॉ. दिव्या सोनी भी शामिल हैं। 

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Heart astringent drug proving boon in the treatment of heart attack Medicine made in BHU Ayurveda Faculty
BHU - फोटो : Social Media
आयुर्वेद संकाय में तैयार है दवा के 100 डिब्बे
आयुर्वेद संकाय के क्रिया शारीर विभाग में फिलहाल दवा के 100 डिब्बे तैयार हैं। वैद्य सुशील दूबे के अनुसार, एक डिब्बा 60 ग्राम का है। इसे सुबह और शाम तीन ग्राम लेना है। 10 मरीजों को यह दवा दी गई है, जिसका प्राथमिक स्तर पर सार्थक परिणाम देखने को मिला है। 1200 लोगों को देने का लक्ष्य रखा गया है।  

क्या है हृदय महाकषाय 
वैद्य सुशील कुमार दूबे ने बताया कि 10 खट्टे रस वाले फलों के इस्तेमाल से औषधि बनाई गई है। इसमें अनार, नींबू, आम, इमली, बेर, बड़हर को शामिल किया गया है। चरक में बताया गया है कि ये औषधियां हृदय के लिए लाभकारी हैं, ऐसा शास्त्रों में भी लिखा है। दो ग्रुप में मरीजों को दवाएं दी जाएंगी। एक ग्रुप में हृदय रोग की एलोपैथिक दवा खाने वाले, दूसरे ग्रुप के मरीज को केवल हृदयमहाकषाय दिया जाएगा। दस मरीजों पर सुखद परिणाम आए हैं। आने वाले दिनों में और बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।
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