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...तो कठिन है आयुष्मान का ‘आशीर्वाद’
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केस-एक
तीन महीने से काट रहे चक्कर
बीएचयू के ट्रामा सेंटर में गोपाल प्रसाद गुप्ता का इलाज कराया गया। परिजनों के पास गोल्डन कार्ड भी था। लेकिन इलाज के दौरान दवा बाहर से मंगवाई गई, जबकि योजना के तहत नि:शुल्क इलाज होना है। परिजनों ने चिकित्सकों से बातचीत की, जब समस्या हल नहीं हुई तो 19 जून को इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय स्थित ग्रीवांस सेल में की गई। सेल के सदस्यों ने जांच कर समाधान कराने की कोशिश की, लेकिन जब कुछ नहीं हो सका तो इसे जिला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में रखा गया। इसका निस्तारण होना बाकी है।
केस-दो
शिकायत की तब रुपये मिले वापस
बड़ी पियरी स्थित एक नर्सिगिं होम में अंजली गुप्ता को परिजनों ने डिलिवरी के लिए मई में भर्ती कराया था। गोल्डन कार्ड होने के बाद भी इलाज का खर्च परिजनों से लिया गया। परिजनों ने इस बारे में पूछताछ की तो किसी ने सही जानकारी नहीं दी। तीन मई 2019 को परिजनों ने सीएमओ कार्यालय स्थित ग्रीवांस सेल में इसकी शिकायत की। इसके बाद परिजन भागदौड़ करते रहे। कुछ दिन बाद सीएमओ के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई और संबंधित अस्पताल से मरीज के खाते में पैसे वापस किए गए।
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। आयुष्मान योजना का लाभ पाने के लिए मरीजों के तीमारदारों को खूब चक्कर कटवाए जाते हैं। ऐसा एक-दो मामलों में नहीं, बीते एक साल में 200 मरीजों के परिजनों के साथ हुआ। यह तो वह मामले हैं जिनकी शिकायत ग्रीवांस सेल में पहुंची है। इनमें से 150 का निस्तारण हो चुका है, मगर 50 शिकायतें ऐसी हैं, जिनकी फाइलें अब भी अटकी हैं।
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जिले में बीते एक साल में 16522 गोल्डन कार्ड धारकों को आयुष्मान योजना का लाभ मिला। इनमें से 11,035 मरीजों ने निजी और 5487 ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया। लेकिन योजना का पूरा लाभ देने में अस्पतालों ने लापरवाही भी की, इस बात की गवाही सरकारी आंकड़े ही दे रहे हैं। शिकायतों के निस्तारण के लिए गठित ग्रीवांस सेल में 200 शिकायतें आईं। सेंट्रल ग्रीवांस रेड्रेसल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए 160, ऑफलाइन 30 और आईजीआरएस के तहत 10 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें किसी ने दवा तो किसी ने जांच के नाम पर रुपये लेने की शिकायत की है। जबकि योजना के तहत मरीज का इलाज निर्धारित पैकेज पर ही करना होता है। मरीज या परिजन से कोई शुल्क नहीं लेने की शर्त भी है। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल निजी अस्पताल ही शामिल हैं, बल्कि सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू और ट्रामा सेंटर के खिलाफ भी शिकायतें हुई हैं।
यहां कर सकते हैं शिकायत
आयुष्मान योजना का लाभ न मिलने सहित अन्य समस्याओं के लिए अगर शिकायत करनी हो तो वह मोबाइल नंबर 8881000104 पर की जा सकती है। जिलाधिकारी द्वारा नामित अपर जिलाधिकारी प्रोटोकाल की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय शिकायत निवारण समिति जांच के बाद शिकायत का निस्तारण कराती है। अगर यहां से कोई मामला नहीं सुलझ पाता है तो उसे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर रेफर किया जाता है।
--- कोट---
लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके और किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए ग्रीवांस सेल का गठन किया गया है। यहां आने वाली शिकायतों का निस्तारण अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर तत्काल कराया जाता है। योजना के तहत भर्ती होने वाले किसी भी मरीज से कोई खर्च नहीं लिया जा सकता है। -डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ
यहां दे सकते हैं जानकारी
अगर आप योजना से जुड़ी जानकारी हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 7617566161 पर मेसेज कर सकते हैं। साथ ही vns-cityreporter@vns.amarujala.com पर भी सूचना दे सकते हैं।
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तीन महीने से काट रहे चक्कर
बीएचयू के ट्रामा सेंटर में गोपाल प्रसाद गुप्ता का इलाज कराया गया। परिजनों के पास गोल्डन कार्ड भी था। लेकिन इलाज के दौरान दवा बाहर से मंगवाई गई, जबकि योजना के तहत नि:शुल्क इलाज होना है। परिजनों ने चिकित्सकों से बातचीत की, जब समस्या हल नहीं हुई तो 19 जून को इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय स्थित ग्रीवांस सेल में की गई। सेल के सदस्यों ने जांच कर समाधान कराने की कोशिश की, लेकिन जब कुछ नहीं हो सका तो इसे जिला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में रखा गया। इसका निस्तारण होना बाकी है।
केस-दो
शिकायत की तब रुपये मिले वापस
बड़ी पियरी स्थित एक नर्सिगिं होम में अंजली गुप्ता को परिजनों ने डिलिवरी के लिए मई में भर्ती कराया था। गोल्डन कार्ड होने के बाद भी इलाज का खर्च परिजनों से लिया गया। परिजनों ने इस बारे में पूछताछ की तो किसी ने सही जानकारी नहीं दी। तीन मई 2019 को परिजनों ने सीएमओ कार्यालय स्थित ग्रीवांस सेल में इसकी शिकायत की। इसके बाद परिजन भागदौड़ करते रहे। कुछ दिन बाद सीएमओ के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई और संबंधित अस्पताल से मरीज के खाते में पैसे वापस किए गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। आयुष्मान योजना का लाभ पाने के लिए मरीजों के तीमारदारों को खूब चक्कर कटवाए जाते हैं। ऐसा एक-दो मामलों में नहीं, बीते एक साल में 200 मरीजों के परिजनों के साथ हुआ। यह तो वह मामले हैं जिनकी शिकायत ग्रीवांस सेल में पहुंची है। इनमें से 150 का निस्तारण हो चुका है, मगर 50 शिकायतें ऐसी हैं, जिनकी फाइलें अब भी अटकी हैं।
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जिले में बीते एक साल में 16522 गोल्डन कार्ड धारकों को आयुष्मान योजना का लाभ मिला। इनमें से 11,035 मरीजों ने निजी और 5487 ने सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया। लेकिन योजना का पूरा लाभ देने में अस्पतालों ने लापरवाही भी की, इस बात की गवाही सरकारी आंकड़े ही दे रहे हैं। शिकायतों के निस्तारण के लिए गठित ग्रीवांस सेल में 200 शिकायतें आईं। सेंट्रल ग्रीवांस रेड्रेसल मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए 160, ऑफलाइन 30 और आईजीआरएस के तहत 10 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें किसी ने दवा तो किसी ने जांच के नाम पर रुपये लेने की शिकायत की है। जबकि योजना के तहत मरीज का इलाज निर्धारित पैकेज पर ही करना होता है। मरीज या परिजन से कोई शुल्क नहीं लेने की शर्त भी है। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल निजी अस्पताल ही शामिल हैं, बल्कि सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू और ट्रामा सेंटर के खिलाफ भी शिकायतें हुई हैं।
यहां कर सकते हैं शिकायत
आयुष्मान योजना का लाभ न मिलने सहित अन्य समस्याओं के लिए अगर शिकायत करनी हो तो वह मोबाइल नंबर 8881000104 पर की जा सकती है। जिलाधिकारी द्वारा नामित अपर जिलाधिकारी प्रोटोकाल की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय शिकायत निवारण समिति जांच के बाद शिकायत का निस्तारण कराती है। अगर यहां से कोई मामला नहीं सुलझ पाता है तो उसे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर रेफर किया जाता है।
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लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके और किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए ग्रीवांस सेल का गठन किया गया है। यहां आने वाली शिकायतों का निस्तारण अस्पताल प्रबंधन से बातचीत कर तत्काल कराया जाता है। योजना के तहत भर्ती होने वाले किसी भी मरीज से कोई खर्च नहीं लिया जा सकता है। -डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ
यहां दे सकते हैं जानकारी
अगर आप योजना से जुड़ी जानकारी हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो व्हाट्सएप नंबर 7617566161 पर मेसेज कर सकते हैं। साथ ही vns-cityreporter@vns.amarujala.com पर भी सूचना दे सकते हैं।