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हाथरस दुष्कर्म: बनारस में महिलाओं की मांग, दुष्कर्मियों को मिले कड़ी सजा, अपराधियों में सजा का खौफ होगा तभी रुकेगी दरिंदगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 30 Sep 2020 08:35 PM IST
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Hathras Gang Rape Case
Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला

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हाथरस में बिटिया के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद अस्पताल में उसकी मौत से पूरा देश सदमे में है। इस अमानवीय घटना के विरोध में देश के अलग अलग हिस्से में लोग उठ खड़े हुए हैं। चारों तरफ इस घटना की आलोचना हो रही है और लोगों में जबरदस्त गुस्सा है।
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निर्भया कांड के बाद लगा था कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े कानून असरदार साबित होंगे और अपराधियों पर अंकुश लगेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। हाथरस कांड में बेटी के साथ हुई दरिंदगी पर महिलाओं ने कहा कि बेटियों के साथ अत्याचार करने वालों को सजा सुनाने में न्यायालय को ट्रायल करने की कोई जरूरत नहीं है। अपराधियों में सजा का खौफ होगा तभी इस तरह की दरिंदगी रुकेगी।



हाथरस की घटना ने निर्भया कांड की याद दिला दी है। बेटियों की रक्षा के लिए न्यायालय को सख्त कानून बनाने की जरूरत है। जो इस तरह के अपराध करने वालों या ऐसी सोच रखने वालों के जेहन में खौफ पैदा कर सके। - दीपिका राय, अधिवक्ता

न्याय व्यवस्था में इस तरह के अपराधों के लिए मिलने वाली सजा में सुधार की आवश्यकता है। इसके लिए महिलाओं को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। अपने बेटों को महिला का सम्मान करना सिखाना होगा। - प्रतिमा पांडेय, अधिवक्ता

ऐसी दरिंदगी को रोकने के लिए हमें अपनी बेटियों को मजबूत बनाना होगा। दुष्कर्म के बाद एक बेटी को मानसिक व सामाजिक रूप से प्रताडि़त किया जाता है। दोषियों और उसके परिवार का भी सामाजिक बहिष्कार हो। - भावना कालरा, मान्या क्लब

निर्भया को न्याय मिलने में 11 साल लग गए। अब हाथरस की बिटिया को न्याय कब मिलेगा देखना होगा। आज भी लड़कियां कहीं सुरक्षित नहीं है। सरकार चाहे जो भी वादे करें, लेकिन परिस्थितियां जस की तस हैं। - शिप्रा भार्गव, संगिनी सुरभि क्लब 

हाथरस में जो हुआ व अमानवीय है। इस जघन्य अपराध के दोषियों को कठोर से कठोर सजा होनी चाहिए। महीनों और सालों में नहीं  बल्कि चंद दिनों में। दोषियों में ऐसे अपराध की सजा का खौफ पैदा करना जरूरी है। -  मीना त्रिवेदी, अनन्या क्लब

हाथरस की घटना दिखाती है कि हमारी मानवता किस हद तक गिर चुकी है। लगता है कि देश अब प्रगतिशील है, पर ऐसी घटनाओं से मनोबल गिर जाता है। ऐसे अपराधों के लिए न्याय व्यवस्था में बदलाव करना चाहिए। - आरती सिंह, समाजसेविका

ऐसे अपराधी विकृत मानसिकता के होते हैं। इनके अंदर समाज, सरकार और प्रशासन का कोई डर नहीं होता। इसलिए इनके अंदर कानून का खौफ पैदा करना जरूरी है। इनके और इनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए। - नीता सिंह, कारोबारी

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