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Varanasi News: मां विशालाक्षी के प्राकट्य उत्सव पर हरियाली शृंगार, 5000 श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
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वाराणसी। दक्षिण भारतीय शैली और काशी की सकरी गलियों में विराजमान 51 शक्तिपीठों में से एक आदिशक्ति मां विशालाक्षी के प्राकट्य उत्सव पर सोमवार को मीरघाट स्थित मंदिर में मां का हरियाली शृंगार किया गया। सजी अलौकिक झांकी के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी रही। देर रात तक श्रद्धा और भक्ति के साथ भजनों की गंगा प्रवाहित हुई। भंडारे में 5000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मां का प्रसाद ग्रहण किया।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मां विशालाक्षी का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। महंत परिवार की ओर से मां विशालाक्षी का शृंगार, विराट आरती और विशाल भंडारा हुआ। माता को पंचामृत स्नान कराकर नूतन वस्त्र और आभूषण से सुसज्जित किया गया। इसके बाद बसंत पूजा के लिए शृंगार किया गया। मंदिर परिसर को कामिनी, अशोक की पत्ती, बेला, जूही, गेंदा सहित विभिन्न प्रकार के फूलों, विद्युत झालरों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। मंदिर के कपाट मंगला आरती के बाद सुबह पांच बजे भक्तों के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए। मां के जयकारे के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
महंत परिवार के महंत राजनाथ तिवारी, पं. नितिन तिवारी, पं. अनिल तिवारी, पं. विकास तिवारी और जतिन तिवारी ने माता का शृंगार व विधिवत पूजन किया। उन्होंने डमरुओं की निनाद के साथ शयन आरती की। कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में भजन संध्या का आयोजन हुआ। भक्ति संगीत, सोहर, कजरी और देवी गीतों से कलाकारों ने माता की आराधना की। अनामिका ने वायलिन से देवी गीतों की धुन पेश की। विशालाक्षी ने गणेश वंदना पर भावनृत्य प्रस्तुत किया। भजन गायक डॉ. विजय कपूर ने हे अंबे तिहारी इच्छा, हम द्वार तुम्हारे आए हैं... सुनाया।
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डॉ. अमलेश शुक्ला अमन ने विशालाक्षी मां का हरियाली शृंगार है..., बाल कलाकार यथार्थ दुबे ने अई गिरी नंदिनी, मेरा दिल भैया अब तेरा हो गया..., अपर्णा ने मैया के दर पर देर है, अंधेर नहीं है..., भोजपुरी गायिका शैलवाला ने किसने सजाया है तुझको मैया...सुनाया। ओम तिवारी ने विशालाक्षी मैया के चरणों में सर हो मेरा..., स्नेहा अवस्थी ने मैंने ऐसा दरबार नहीं देखा..., आस्था शुक्ला ने ओ मैया, शृंगार तेरा लाल है..., अंशिका सिंह ने देवी पूजी पद कमल तुम्हारे... सुनाया। अरुण मिश्रा ने बैंड बजवा बजाई दे, भवानी आई रे... सहित देवी सोहर पेश किया। तबले पर पंकज राय, ढोलक पर सिकंदर और संतोष तथा पैड पर विवेक ने संगत की। महंत परिवार ने कलाकारों को प्रसाद और चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया।
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर मां विशालाक्षी का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। महंत परिवार की ओर से मां विशालाक्षी का शृंगार, विराट आरती और विशाल भंडारा हुआ। माता को पंचामृत स्नान कराकर नूतन वस्त्र और आभूषण से सुसज्जित किया गया। इसके बाद बसंत पूजा के लिए शृंगार किया गया। मंदिर परिसर को कामिनी, अशोक की पत्ती, बेला, जूही, गेंदा सहित विभिन्न प्रकार के फूलों, विद्युत झालरों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। मंदिर के कपाट मंगला आरती के बाद सुबह पांच बजे भक्तों के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए। मां के जयकारे के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
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महंत परिवार के महंत राजनाथ तिवारी, पं. नितिन तिवारी, पं. अनिल तिवारी, पं. विकास तिवारी और जतिन तिवारी ने माता का शृंगार व विधिवत पूजन किया। उन्होंने डमरुओं की निनाद के साथ शयन आरती की। कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में भजन संध्या का आयोजन हुआ। भक्ति संगीत, सोहर, कजरी और देवी गीतों से कलाकारों ने माता की आराधना की। अनामिका ने वायलिन से देवी गीतों की धुन पेश की। विशालाक्षी ने गणेश वंदना पर भावनृत्य प्रस्तुत किया। भजन गायक डॉ. विजय कपूर ने हे अंबे तिहारी इच्छा, हम द्वार तुम्हारे आए हैं... सुनाया।
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डॉ. अमलेश शुक्ला अमन ने विशालाक्षी मां का हरियाली शृंगार है..., बाल कलाकार यथार्थ दुबे ने अई गिरी नंदिनी, मेरा दिल भैया अब तेरा हो गया..., अपर्णा ने मैया के दर पर देर है, अंधेर नहीं है..., भोजपुरी गायिका शैलवाला ने किसने सजाया है तुझको मैया...सुनाया। ओम तिवारी ने विशालाक्षी मैया के चरणों में सर हो मेरा..., स्नेहा अवस्थी ने मैंने ऐसा दरबार नहीं देखा..., आस्था शुक्ला ने ओ मैया, शृंगार तेरा लाल है..., अंशिका सिंह ने देवी पूजी पद कमल तुम्हारे... सुनाया। अरुण मिश्रा ने बैंड बजवा बजाई दे, भवानी आई रे... सहित देवी सोहर पेश किया। तबले पर पंकज राय, ढोलक पर सिकंदर और संतोष तथा पैड पर विवेक ने संगत की। महंत परिवार ने कलाकारों को प्रसाद और चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया।