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दिव्यांग दंपती की बेटी ने दिवाली के दिन फांसी लगाकर दी जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Fri, 09 Nov 2018 04:12 PM IST
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दिवाली के दिन एक दिव्यांग दंपती के उपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी। मामला यूपी के मिर्जापुर जिले का है। हलिया थाना क्षेत्र के महोगढ़ी गांव में बुधवार को सुबह कक्षा की 10 की छात्रा की लाश उसके कमरे में फंदे से लटकती मिली।
इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बेटी की मौत से आहत दिव्यांग माता-पिता रोते-बिलखते बदहवास होने लगे। गांव के लोग किसी तरह उन्हें संभालते रहे।
मौत का कारण आर्थिक तंगी बताई जा रही है। महोगढ़ी गांव निवासी नंदलाल गौड़ और पत्नी श्याम पत्ती दोनों दिव्यांग हैं। भूमिहीन होने के कारण ड्रमंडगंज घाटी के पास मड़हा लगाकर रहते हैं। नंदलाल को बेटा गरुड़ देव और एक बेटी निरंजली थी।
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इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बेटी की मौत से आहत दिव्यांग माता-पिता रोते-बिलखते बदहवास होने लगे। गांव के लोग किसी तरह उन्हें संभालते रहे।
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मौत का कारण आर्थिक तंगी बताई जा रही है। महोगढ़ी गांव निवासी नंदलाल गौड़ और पत्नी श्याम पत्ती दोनों दिव्यांग हैं। भूमिहीन होने के कारण ड्रमंडगंज घाटी के पास मड़हा लगाकर रहते हैं। नंदलाल को बेटा गरुड़ देव और एक बेटी निरंजली थी।
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UP Police
बेटा दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है। नंदलाल, उनकी पत्नी और बेटी निरंजली घर पर रहते थे। बेटी को पढ़ाने-लिखाने के साथ परिवार का खर्च चलाने में परेशानी हो रही थी। मजदूर बेटे की कमाई गुजर-बसर हो रहा है। परिवार चलाने के लिए नंदलाल की पत्नी भिक्षा मांगती है।
माता-पिता की सारी आशाएं बेटी निरंजली पर टिकी थीं। ग्रामीणों का कहना था कि आर्थिक तंगी के कारण निरंजनी भी काफी परेशान रहती थी। मंगलवार की रात वह खाना खाने के बाद वह सो गई। सुबह वह घर में नहीं दिखी तो माता-पिता उसकी तलाश करने लगे।
कुछ देर बाद एक कमरे में उसका शव लकटता हुआ मिला। आसपास के लोगों ने उसे फंदे से नीचे उतारकर पुलिस को सूचना दी। दिवाली मनाने के लिए सुबह दिल्ली से घर लौटा भाई गरुड़ बहन की लाश देख सन्न रह गया।
माता-पिता की सारी आशाएं बेटी निरंजली पर टिकी थीं। ग्रामीणों का कहना था कि आर्थिक तंगी के कारण निरंजनी भी काफी परेशान रहती थी। मंगलवार की रात वह खाना खाने के बाद वह सो गई। सुबह वह घर में नहीं दिखी तो माता-पिता उसकी तलाश करने लगे।
कुछ देर बाद एक कमरे में उसका शव लकटता हुआ मिला। आसपास के लोगों ने उसे फंदे से नीचे उतारकर पुलिस को सूचना दी। दिवाली मनाने के लिए सुबह दिल्ली से घर लौटा भाई गरुड़ बहन की लाश देख सन्न रह गया।