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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi: The time of worship in the basement was similar to that of Ramlala's life consecration

Gyanvapi: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तरह था तहखाने में पूजन का मुहूर्त, पंचग्रही योग से दूर होंगे एक लाख दोष

Sat, 03 Feb 2024 05:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 03 Feb 2024 05:13 AM IST
सार

पंचग्रही योग में हुई पूजा के दौरान विशेष युति बना रहा गुरु एक लाख दोषों का निवारण करेगा। तुला लग्न का मंगल, शुक्र, बुध, मीन का राहु और मेष का गुरु विजयकारक योग बना रहा है, जो इसमें आने वाले सभी संकटों को दूर करेगा।

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Gyanvapi: The time of worship in the basement was similar to that of Ramlala's life consecration
Gyanvapi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राममंदिर और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तरह तहखाने में पूजन का मुहूर्त था। पंचग्रही योग में हुई पूजा के दौरान विशेष युति बना रहा गुरु एक लाख दोषों का निवारण करेगा। तुला लग्न का मंगल, शुक्र, बुध, मीन का राहु और मेष का गुरु विजयकारक योग बना रहा है, जो इसमें आने वाले सभी संकटों को दूर करेगा।

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राममंदिर का मुहूर्त देने वाले पं. गणेश्वर शास्त्री के बड़े भाई पं. विशेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने बताया कि व्यासजी के तहखाने में पूजन के लिए संधिकाल से पूर्व का मुहूर्त दिया गया था। रात 11:55 बजे तहखाने में प्रवेश करने के बाद 12:14 पर इसे पूर्ण करने का मुहूर्त था। इसके बाद पूजन का समय दिया गया था। इस दौरान के मुहूर्त पर विचार करें तो तुला लग्न में पांच ग्रही योग निर्मित हो रहा था। 
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धनु राशि में मंगल व शुक्र, चौथे घर में बुध, मीन राशि में छठें घर का राहु, मेष राशि में सातवें घर का गुरु केंद्र में बैठकर लग्न को देख रहा था। इसी तरह का मुहूर्त रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए भी दिया गया था। इसमें लग्न में बैठे हुए गुरु ने एक लाख दोषों का परिहार किया। इसी तरह तुला लग्न में मेष राशि में सातवें घर का गुरु केंद्र में बैठक लग्न को देख रहा था। इससे समस्त दोषों का परिहार हो गया। यह सभी योग विधर्मियों को नाश करने वाले और विजयकारक योग निर्मित कर रहे हैं।
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एक लाख श्रद्धालुओं ने किया झांकी दर्शन, शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा के मंत्रों से हो रहा षोडशोपचार पूजन
व्यासजी के तहखाने में शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा के मंत्रों से विग्रहों की षोडशोपचार पूजा हो रही है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी विग्रहों के पांच प्रहर की आरती, राग-भोग अर्पित किया गया। एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने तहखाने में रखे विग्रहों का झांकी दर्शन किया। काशी नरेश महाराज विभूति नारायण सिंह के समय की पूजा पद्धति से ही तहखाने में पूजन किया जा रहा है। शुक्रवार को तहखाने में मंगला आरती सुबह 3:30 बजे, भोग दोपहर 12 बजे, अपराह्न आरती शाम 4 बजे, सांयकाल आरती शाम को 7 बजे और शयनी आरती रात्रि 10:30 बजे हुई।


कूर्म पुराण को आधार बनाकर रखा है नाम
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि व्यासजी के तहखाने का नाम ज्ञान तलगृह रखा गया है। भगवान के स्थान का नाम तहखाना शास्त्रोक्त नहीं था। तलगृह का वर्णन कूर्म पुराण में भी मिलता है। इसी को आधार बनाकर व्यासजी के तहखाने का नाम ज्ञान तलगृह रखा गया है।

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