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Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे का मसाजिद कमेटी ने क्यों किया बहिष्कार? संयुक्त सचिव ने बताए ये कारण

Mon, 24 Jul 2023 05:22 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 24 Jul 2023 05:22 PM IST
सार

वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में हो रहे एएसआई सर्वे का मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी) ने बहिष्कार किया। मुस्लिम पक्ष की तरफ से कहा गया कि हमारी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने सर्वे के औचित्य पर सवाल उठाए। 

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Gyanvapi mosque ASI Survey Why did Masjid Committee boycott know these reasons
ज्ञानवापी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के सील वजूखाने को छोड़कर शेष हिस्से का सर्वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सोमवार सुबह सात बजे से शुरू कर दिया। हालांकि करीब साढ़े पांच घंटे बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सर्वे रोक दिया गया। इस दौरान हिंदू पक्ष की चार वादिनी महिला व उनके चार अधिवक्ता मौजूद रहे। मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सर्वे का बहिष्कार किया। उन्होंने अपने इस फैसले का बचाव किया।  

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मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई की जानकारी प्रशासन व एएसआई की टीम को पहले ही दी गई थी। साफ किया गया था कि कमेटी का ध्यान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर रहेगा। सर्वे में कोई भी शामिल नहीं हो सकेगा।
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मुस्लिम पक्ष ने सर्वे के औचित्य पर सवाल उठाए और कहा कि जिला अदालत के एक फैसले पर पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट के सर्वे से संबंधित आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। ऐसे में सर्वे का आदेश न्यायहित में नहीं है।
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ये भी पढ़ें: ज्ञानवापी मंदिर है या मस्जिद? एएसआई सर्वे से सामने आएगा 353 साल की लड़ाई का सच

मुस्लिम पक्ष मामले को लटकाना चाहता है

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ज्ञानवापी परिसर के बाहर हिंदू पक्ष की महिलाएं और उनके अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला

सर्वे के बाद ज्ञानवापी परिसर से बाहर आए हिंदू पक्ष के अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने मुस्लिम पक्ष पर असहयोग का आरोप लगाया। राखी सिंह के अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इमारत का ताला ही खोलने को तैयार नहीं हो रहा था। मुस्लिम पक्ष मामले को लटकाना चाहता है, इसीलिए सर्वे का बहिष्कार किया। मुस्लिम पक्ष समस्या का समाधान नहीं चाहता है। एएसआई सर्वे से सच सामने आ जाएगा। पता चल जाएगा कि ज्ञानवापी मस्जिद है या मंदिर...। सर्वे में बाधा डालना समाज और न्यायहित में नहीं है। मुस्लिम पक्ष को जिद छोड़कर समाधान के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

ज्ञानवापी परिसर के आसपास रहा गहमागहमी का माहौल

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काशी विश्वनाथ धाम के बाहर तैनात फोर्स - फोटो : अमर उजाला

एएसआई के सर्वे को लेकर ज्ञानवापी परिसर के आसपास के इलाके में सोमवार की सुबह से ही गहमागहमी रही। सावन के तीसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने आए लोग ज्ञानवापी परिसर में सर्वे की बात जानकर हर-हर महादेव का उद्घोष करने लगे। मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा, पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन और डीएम एस. राजलिंगम के साथ ही पुलिस-प्रशासन के आला अफसर श्री काशी विश्वनाथ धाम में मौजूद थे। डीसीपी सुरक्षा सूर्यकांत त्रिपाठी और एडीएम प्रोटोकॉल बच्चू सिंह एएसआई की टीम के साथ ज्ञानवापी परिसर में थे।

साढ़े पांच घंटे तक एएसआई टीम ज्ञानवापी परिसर में रही

जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सील वजूखाने को छोड़कर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कर रिपोर्ट चार अगस्त तक देने का आदेश एएसआई को बीते 21 जुलाई को दिया था। इसी क्रम में लखनऊ, आगरा, दिल्ली, पटना और वाराणसी से एएसआई की 43 सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम सोमवार की सुबह 6:30 बजे श्री काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर-4 पर पहुंची। सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक टीम ज्ञानवापी परिसर में रही। 

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