Gyanvapi: ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस में हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, काशी में गूंजा हर-हर महादेव
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। वाराणसी कोर्ट में दायर पांच हिंदू महिला उपासकों के मुकदमे की विचारणीयता को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर पूजा करने के अधिकार की मांग करते हुए वाराणसी कोर्ट में दायर पांच हिंदू महिला उपासकों के मुकदमे की विचारणीयता को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष यानि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका माना जा रहा है। वहीं इस खबर के बाद से हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है।
वाराणसी कचहरी में मौजूद महिला वादियों, उनके पैरोकारों और अधिवक्ताओं ने हर-हर महादेव के उद्घोष से हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी की अनुरक्षणीय नहीं है और इसे खारिज किया है।
राखी सिंह व नौ अन्य महिलाओं ने पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत में सिविल वाद दायर किया था। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने वाद की पोषणीयता पर आपत्ति करते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की कि कोर्ट को प्लेसेस आफ वर्शिप एक्ट 1991 के उपबंधो के तहत अदालत को वाद सुनने का अधिकार नहीं है।
अदालत ने कमेटी की अर्जी खारिज कर दी। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2022 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने जिला जज वाराणसी के फैसले को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।