Gyanvapi: 7 मामलों की एकसाथ सुनवाई पर हिंदू पक्ष फिर एकमत नहीं, जिला जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगी राखी
जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सभी सात मामलों की सुनवाई एक साथ करने का आदेश दिया है। इस आदेश पर भी हिंदू पक्ष एकमत नहीं है। राखी सिंह के पक्ष की ओर से कहा गया कि वह जिला जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
विस्तार
वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मुकदमों की सुनवाई एकसाथ किए जाने से संबंधित आदेश पर भी हिंदू पक्ष एकमत नहीं है। सीता साहू, रेखा पाठक, मंजू व्यास और लक्ष्मी देवी ने जहां खुशी जताई, वहीं राखी सिंह के पक्ष की ओर से कहा गया कि वह जिला जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
मां श्रृंगार गौरी का मुकदमा राखी सिंह और चार अन्य महिलाओं सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक व लक्ष्मी देवी की ओर से दाखिल किया गया था। अदालत के आदेश से बीते साल जब ज्ञानवापी परिसर में अधिवक्ता आयुक्त द्वारा कमीशन की कार्रवाई की गई तो उसके कुछ वीडियो और फोटो मीडिया में लीक हो गए थे। इसी के बाद राखी सिंह और चार अन्य महिलाओं के पक्ष के बीच मनमुटाव की बातें सामने आईं। समय के साथ दोनों पक्षों के बीच मनमुटाव इस कदर बढ़ता चला गया कि अब मनमुटाव की गहरी खाई खिंच गई है।
'जिला जज की अदालत का आदेश उचित नहीं'
राखी सिंह की ओर से विश्व वैदिक सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि एकसाथ सभी मुकदमों को सुने जाने संबंधी जिला जज की अदालत का आदेश उचित नहीं है। हम इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। मां श्रृंगार गौरी का मसला वहां दर्शन-पूजन की अनुमति प्रदान करने से संबंधित है और अन्य मामले अलग तरह के हैं। सारे मामले एक साथ हो जाएंगे तो उनकी प्रकृति पर असर पड़ेगा। इसलिए विश्व वैदिक सनातन संघ जिला जज की अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा।
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मुस्लिम पक्ष बोला- आदेश न्याय के खिलाफ
जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने मंगलवार को ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सभी सात मामलों की सुनवाई एक साथ करने का आदेश दिया । अभी तक यह मामले अलग-अलग अदालतों में चल रहे थे। अब जिला जज की अदालत में ही सुनवाई होगी। इसकी अगली सुनवाई सात जुलाई को होनी है। जिला जज की अदालत ने कहा कि अदालत ने कहा कि न्याय हित में उचित होगा कि राखी सिंह की तरफ से दाखिल मां श्रृंगार गौरी के मूल वाद में सभी सात मामलों को समाहित कर एक साथ सुना जाए। इसी के साथ अदालत ने मां श्रृंगार गौरी वाद की चार वादिनी महिलाओं के उस आवेदन पत्र को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया, जिसमें ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मामलों को एकसाथ सुने जाने का अनुरोध किया गया था।
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कोर्ट खुद ऑर्डर करे और उसके रिवीजन की भी खुद सुनवाई करे, यह न्याय के खिलाफ है। दोनों पक्ष के वाद प्रभावित होंगे। अधिवक्ता रईस अहमद ने कहा कि अदालत ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया है। अदालत के आदेश का हमारी टीम पूरा अध्ययन करेगी। फिर, हम तय करेंगे कि इस आदेश के खिलाफ हम हाईकोर्ट जाएं या सुप्रीम कोर्ट में अपील करें।
राखी सिंह का मामला होगा प्रमुख
मां श्रृंगार गौरी वाद की पांच वादिनी महिलाओं में से रेखा पाठक, सीता साहू, लक्ष्मी देवी और मंजू व्यास ने सात दिसंबर 2022 को जिला जज की अदालत में आवेदन पत्र देकर ज्ञानवापी से जुड़े एक ही प्रकृति के सात मामलों की सुनवाई एकसाथ किए जाने का अनुरोध किया था। मंगलवार को जिला जज की अदालत ने कहा कि राखी सिंह व अन्य बनाम यूपी राज्य व अन्य प्रमुख मामला होगा। साक्ष्य अग्रणी मामलों में दर्ज किए जाएंगे। राखी सिंह व अन्य के मूल वाद में जिन सात मामलों को एक साथ सुनवाई हेतु समाहित किया गया है, उनमें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन व अन्य, महाराष्ट्र के सुरेश चव्हाण, शिवप्रसाद पांडेय, सत्येंद्र चौधरी, सत्यम त्रिपाठी व पवन पाठक, किरन सिंह विसेन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व सजीवन की तरफ से दाखिल सात मामले शामिल हैं।
ये हैं मामले, जिनकी सुनवाई अब एक साथ होगी
- 18 फरवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और रंजना अग्निहोत्री ने दावा दाखिल किया था। इसमें ज्ञानवापी परिसर को काशी विश्वनाथ का मूल मंदिर स्थान बताते हुए भगवान आदि विश्वेश्वरनाथ और देवी शृंगार गौरी समेत अन्य देवी-देवताओं की अनवरत सेवा-पूजा के अधिकार की मांग की गई है।
- 19 मार्च 2019 को महाराष्ट्र निवासी सुरेश चह्वाण ने दावा दाखिल किया। इसमें ज्ञानवापी परिसर स्थित आदि विश्वेश्वरनाथ को अराध्य देव बताते हुए उनकी पूजा करने का अधिकार देने की मांग की गई है।
- 14 सितंबर 2021 को ज्योतिर्लिंग भगवान आदि विश्वेश्वर की ओर से शीतला माता मंदिर के महंत पंडित शिव प्रसाद पांडेय ने दावा दाखिल किया है।
- 14 सितंबर 2021 को मीरघाट निवासी सितेंद्र चौधरी और अन्य ने नंदीजी महाराज की ओर से दावा दाखिल किया।
- वर्ष 2021 में लखनऊ निवासी सत्यम त्रिपाठी, पवन कुमार पाठक आदि ने दावा दाखिल किया है। दावे में भगवान विश्वेश्वरनाथ और अन्य देवी-देवताओं के दर्शन-पूजन का अधिकार देने की मांग की गई है।
- 4 जून 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। इसमें ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग को आदि विश्वेश्वर बताते हुए उनकी नियमित पूजा-पाठ, राग-भोग और शृंगार की मांग की गई है।
- 24 मई 2022 को भगवान आदि विश्वेश्वर की ओर से विश्व वैदिक सनातन संघ की अतंरराष्ट्रीय महामंत्री किरन सिंह विसेन ने दावा दाखिल किया। इसमें ज्ञानवापी परिसर भगवान आदि विश्वेश्वर को सौंपने की मांग की गई है।