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काशी की लगातार गिर रही रैंकिंग: 40 करोड़ के इंतजाम, फिर भी हवा नहीं हुई साफ, वाराणसी 31 पायदान फिसला

Wed, 09 Sep 2026 10:07 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Wed, 09 Sep 2026 10:07 AM IST
सार

करोड़ों खर्च करने के बावजूद काशी की हवा नहीं साफ हुई। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वाराणसी की रैंकिंग लगातार नीचे जा रही है। तीन साल पहले 191 अंक के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहने वाला शहर अब 31 पायदान नीचे पहुंच चुका है। 

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Varanasi ranking in Clean Air Survey consistently declining
लहरतारा में वाहनों से निकलता धुंआ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी की हवा साफ करने के लिए नगर निगम के पास 180 करोड़ रुपये का सफाई बजट है, जिसमें करीब 40 करोड़ रुपये वायु प्रदूषण से बचाव और नियंत्रण के लिए रखे गए हैं। इसके बावजूद स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वाराणसी की रैंकिंग लगातार नीचे जा रही है। 

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सोमवार को जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में वाराणसी 150 अंकों के साथ 34वें स्थान पर रहा। तीन साल पहले 191 अंक के साथ देश में तीसरे स्थान पर रहने वाला शहर अब 31 पायदान नीचे पहुंच चुका है। 
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करोड़ों के बजट और प्रदूषण नियंत्रण के तमाम इंतजामों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार न होना बड़ा सवाल है। नगर निगम का कुल सफाई बजट करीब 180 करोड़ रुपये है। इसमें वायु प्रदूषण से बचाव और नियंत्रण के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का प्रावधान है। 

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प्रदूषण की निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में करीब 50 एंबिएंट एयर मॉनिटरिंग उपकरण लगाए गए हैं। इनसे पीएम-2.5 और पीएम-10 समेत प्रदूषण के स्तर की रियल टाइम निगरानी का दावा है। इन सेंसर के जरिये प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर कार्रवाई की जानी है। इसके बावजूद रैंकिंग में लगातार गिरावट ने इन इंतजामों के असर पर सवाल खड़े किए हैं। 

नगर निगम और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार शहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों पर उड़ती धूल और बढ़ते ट्रैफिक का दबाव हवा की गुणवत्ता सुधारने में बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब चुनौती केवल नए उपकरण और अभियान शुरू करने की नहीं, बल्कि 40 करोड़ के वायु प्रदूषण नियंत्रण बजट का जमीन पर कितना असर हुआ, इसे मापने की है।

नगर निगम का दावा, सड़क, नाली, धूल सभी पर हो रहे प्रयास
नगर निगम के जोनल स्वच्छता अधिकारी एसके भार्गव के मुताबिक धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर मल्टी-फंक्शन वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन से पानी का छिड़काव किया जाता है। इसके लिए एसटीपी से उपचारित पानी के इस्तेमाल किया जाता है। प्रमुख चौराहों पर वाटर फाउंटेन लगाने की योजना भी है। नगर निगम के अनुसार सड़कों के किनारे उड़ने वाली धूल रोकने के लिए फुटपाथ और रोड शोल्डर का पक्कीकरण किया जा रहा है।

इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने के साथ ऐसे पेवमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके बीच घास उगाई जा सके। खाली स्थानों और गार्डन में हरियाली बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। गड्ढों के कारण वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए पैचवर्क और ब्लैकटॉपिंग पर भी जोर दिया जा रहा है।

लगातार गिर रही रैकिंग
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में वाराणसी का इस साल का प्रदर्शन पिछले तीन वर्षों में सबसे खराब रहा है। वर्ष 2023 में वाराणसी 191 अंक के साथ देश में तीसरे स्थान पर था और उसे नेशनल क्लीन एयर सिटी का पुरस्कार भी मिला था। 2024 में 176.5 अंक के साथ नौवां और 2025 में 184 अंक के साथ 11वां स्थान मिला। अब 2026 में अंक घटकर 150 रह गए और रैंकिंग 34वें स्थान पर पहुंच गई। इसके उलट प्रदेश के कई शहरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। लखनऊ 198 अंकों के साथ देश में पहले, आगरा चौथे, गाजियाबाद नौवें, कानपुर 11वें, प्रयागराज 13वें और मेरठ 22वें स्थान पर रहा।

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