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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi Hearing in two cases decision on transfer application will be taken on 7 July

Gyanvapi: दो मामलों में सुनवाई, स्थानांतरण की अर्जी पर सात जुलाई को आएगा फैसला; पक्षकार पर इस दिन निर्णय

Sun, 06 Jul 2025 05:46 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 06 Jul 2025 05:46 AM IST
सार

इससे पहले ज्ञानवापी से संबंधित अंजुमन इंतजामिया मसाजिद और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दाखिल निगरानी अर्जी पर भी सुनवाई हुई थी। अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

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Gyanvapi Hearing in two cases decision on transfer application will be taken on 7 July
ज्ञानवापी मामले में सुनवाई टली। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: ज्ञानवापी के दो मामलों की सुनवाई शनिवार को जिला जज जय प्रकाश तिवारी की अदालत में हुई। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) की अदालत में चल रहे मामले के स्थानांतरण की अर्जी पर दोनों पक्षों ने दलील दी। सुनवाई के बाद अदालत ने फैसले के लिए सात जुलाई की तिथि तय की है। वहीं, एक अन्य मामले की सुनवाई 24 जुलाई को होगी।

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मां शृंगार गौरी की पूजा से संबंधित राखी सिंह समेत पांच महिलाओं की तरफ से दाखिल वाद में पक्षकार बनाने की अपील की गई है। चोलापुर निवासी जय प्रकाश रामचंद्र राजभर ने अपने प्रार्थना पत्र की प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराई। मामले में अगली सुनवाई अब 24 जुलाई को होगी।
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इसी तरह जिला जज ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक) की अदालत में लंबित मुकदमे को अन्य अदालत में स्थानांतरित करने के स्व. हरिहर पांडेय की पुत्रियों मणिकुंतला तिवारी, नीलिमा मिश्रा व रेणु पांडेय के प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई की। 
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मणिकुंतला तिवारी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने दलील दी कि उक्त अदालत में पक्ष रखने के लिए उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। इस पर वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने प्रार्थना पत्र की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जिला जज ने आदेश के लिए सात जुलाई की तिथि मुकर्रर कर दी।

व्यवसायी के खिलाफ दाखिल प्रार्थना पत्र खारिज
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की कोर्ट ने शुक्रवार को व्यवसायी के खिलाफ दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग समेत अन्य आरोपों में दाखिल प्रार्थना पत्र को सुनवाई के बाद खारिज कर दी।

पीड़िता ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। आरोप था कि व्यवसायी एस. उदय शंकर राव ने शारीरिक व मानसिक शोषण किया। 3 फरवरी 2025 की शाम धमकी दी। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि व्यवसायी ने महिला के खिलाफ सारनाथ थाने में पूर्व में मुकदमा दर्ज कराया है। 

मुकदमे की रंजिश को लेकर पीड़िता ने फर्जी एवं मनगढ़ंत कहानी बनाकर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अपर पुलिस आयुक्त द्वारा की गई जांच में पीड़िता द्वारा लगाए गए सभी आरोप असत्य एवं निराधार पाए गए है। उसका आवेदन खारिज किया जाता है।

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