Gyanvapi Case: शिवलिंग नहीं, फव्वारा होने के दावे पर हिंदू पक्ष का सवाल, वकील विष्णु जैन बोले- सच सामने आना जरूरी
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे पूरा होने के बाद हिंदू पक्ष ने वहां वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया। वहीं मसाजिद कमेटी पक्ष ने दावा किया कि वह फव्वारा है। वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णु जैन ने इस बात पर आपत्ति जाहिर की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई सवाल उठाए।
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वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में याचिकाकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके बेटे विष्णु जैन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मसाजिद कमेटी की ओर से शिवलिंग को फव्वारा बताए जाने पर आपत्ति जाहिर की। विष्णु जैन ने कहा कि अगर वो फव्वारा है तो उसे चलाकर दिखाएं। साथ ही ये भी कहा कि वो (प्रतिवादी पक्ष) हमें नीचे जाने से क्यों मना कर रहे हैं।
वजू खाने में मिले शिवलिंग के फव्वारा होने के दूसरे पक्ष के दावे पर उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो वे फव्वारा चलाकर दिखा दें। फव्वारा है तो उनके नीचे पानी सप्लाई की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। दूसरे पक्ष को जांच में फिर दिक्कत क्यों है।
हम लोग उसे शिवलिंग प्रमाणित करने के लिए जितनी भी बातें हैं उसे सामने लेकर आएंगे। सच क्या है यह सामने आना सबसे जरूरी है। इस दौरान उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद के फव्वारे के नाम से वायरल एक वीडियो को दिखाया और कहा कि यही वह शिवलिंग है जिसे उन्होंने ज्ञानवापी परिसर स्थित हौद में देखा था। आगे कहा कि इस वीडियो में सिर्फ ऊपर का हिस्सा दिख रहा है। इसमें व्यासजी का कमरा नहीं दिख रहा है।
नंदी के सामने से शिवलिंग तक जाता है रास्ता
बताया कि हमने कोर्ट में आवेदन दिया हैं कि हमें वजू खाने के नीचे जो दीवार है, उसे तोड़कर जाने की इजाजत दी जाए। रविंद्रपुरी स्थित एक अस्पताल में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वादी पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ने कहा कि माहौल बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ एक पक्ष की नहीं, हम कानून के रक्षक हैं और हमारा काम जनभावनाओं और सच को सामने लाना है।
उन्होंने दावा किया कि नंदी जी के सामने व्यासजी के कक्ष से शिवलिंग तक रास्ता जाता है। बताया कि वहां खुदाई कराने की मांग की गई है। इसके पहले विष्णु जैन ने बताया कि उनके पिता हरिशंकर जैन को अस्थमा अटैक के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां काफी अच्छे इलाज के बाद अब वह ठीक हैं।
अभी और चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे
वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने कहा कि भोलेनाथ को 352 साल से कैद रखा गया था। अब स्वयंभू भगवान खुद से प्रकट हुए हैं और जनता के सामने आ गई है। । अभी इंतजार करिए, आगे और चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। कहा कि शिवलिंग को कोई फव्वारा बता रहा है तो कोई कुछ कह रहा है। कहने को आदमी कुछ भी कह देगा। अभी आगे भी जांच होगी।
नीचे कहां तक शिवलिंग गया है वो सामने आएगा और काफी चौकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। कहा कि वो इस केस से जुड़े हैं और आखरी सांस तक जुड़े रहेंगे। हरिशंकर जैन ने कहा कि हमारे भगवान बद्द्तर हालत में रहें और हम माहौल को देखें तो हमें ऐसा माहौल नहीं चाहिए। हमें फिक्र नहीं कि माहौल बिगड़े या सही रहे। उन लोगों को शर्मिन्दा होना चाहिए कि वो सत्य को छुपा कर बैठे हुए थे।
वीडियो वायरल मामले में हिंदू-मुस्लिम पक्ष की नजर
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। जहां एक वीडियो में कमीशन की कार्यवाही के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है, तो वहीं दूसरे वीडियो में इसे फव्वारा बताया जा रहा है। दोनों पक्षों के लोग इस पर नजर बनाए हुए हैं। मुस्लिम पक्ष जहां कमीशन की रिपोर्ट दाखिल होने के इंतजार कर रहा है, तो वहीं हिंदू पक्ष विचार कर रहा है।
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता एखलाक अहमद ने कहा कि जब तक अदालत में कमीशन की कार्यवाही की रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती है, तब तक हमें कुछ नहीं करना है। रिपोर्ट दाखिल होने के बाद तमाम बिंदुओं पर आपत्ति की जाएगी। उधर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि जो वीडियो या फोटो वायरल हो रहा है, वह काफी धुंधला है। आसपास की छतों से मीडिया के लोग जूम करके बनाए हैं। पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी था। वहीं लोग वायरल कर रहे हैं। आपत्ति के सवाल पर कहा कि इस पर हम लोग भी विचार कर रहे हैं।
नमाजियों को नमाज अदा करने में नहीं आएगी दिक्कत : डीएम
ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने वाले क्षेत्र को संरक्षित करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि आदेश का पूर्ण अनुपालन कराया जाएगा। नमाजियों को नमाज अदा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि 16 मई को सिविल जज सीनियर डिवीजन के आदेशानुसार नामित अधिकारियों की ओर से पानी के कृत्रिम तालाब के सभी ओर के नौ दरवाजे बंद करके सील कर दिए गए थे। इनकी चाबी भी सील करके जिला कोषागार में जमा करा दी गई थी। जिलाधिकारी ने बताया कि मंगलवार को सिविल न्यायालय में आवेदन के माध्यम से तीन बिंदुओं पर निर्देश मांगा गया है। इस आवेदन पर न्यायालय ने सभी पक्षों को 18 मई तक आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया है।
इस आवेदन में बताया गया कि वजू करने के लिए परिसर में सील हो गई पाइप लाइन को वजू के लिए बाहर शिफ्ट करना आवश्यक प्रतीत होता है। शौचालय भी सील किए गए परिसर में स्थित होने की वजह से अंदर ही बंद ही गए हैं। तालाब में मछलियों के जीवन को खतरा है। इसलिए उन्हें स्थानांतरित करना भी आवश्यक प्रतीत होता है।
परिसर को सील रखते हुए न्यायालय द्वारा इन तीनों बिंदुओं पर समुचित निर्देश मांगे गए हैं। आवेदन में यह भी मांग की गई है कि इस पर भी न्यायालय किसी कोर्ट कमिश्नर को भेज कर रिपोर्ट प्राप्त कर समुचित निर्देश जारी कर दें। इसमें जो भी न्यायालय का आदेश होगा, उनका पालन कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि तीनों प्रतिवादी उत्तर प्रदेश सरकार, जिलाधिकारी वाराणसी और पुलिस आयुक्त वाराणसी सभी न्यायालयों के समस्त आदेशों का पूर्ण पालन कराएंगे।