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Gyanvapi Case: हिंदू सो रहे हैं और वफ्फ बोर्ड सरकारी संपत्तियों पर करता जा रहा है कब्जा, अदालत में हिंदू पक्ष ने दीं दलीलें

Sat, 16 Jul 2022 09:35 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 16 Jul 2022 09:35 AM IST
सार

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी और अन्य ग्रहों के नियमित दर्शन पूजन मामले की सुनवाई लगातार चौथे दिन शुक्रवार को वाराणसी के जिला जज की अदालत में हुई। 

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Gyanvapi case hearing on 18th july Hindu side attacks on UP Sunni Central Waqf Board and alleging forgery in varanasi court
अदालत के बाहर हिंदू पक्ष के अधिवक्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी और अन्य ग्रहों के नियमित दर्शन पूजन मामले की पोषणीयता पर शुक्रवार को चौथे दिन भी जोरदार बहस हुई। सुनवाई में हिंदू पक्ष ने चौथे दिन अपनी दलील दी और कहा कि वक्फ बोर्ड देश की सरकारी संपत्तियों को इसी तरह कई जगहों पर कब्जा कर रहा है और हिंदू सो रहे हैं। 

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने बहस के चौथे दिन दलील में वक्फ असेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण का हवाला दिया और कहा कि ज्ञानवापी प्रापर्टी के वक्फ का नोटिफिकेशन, वक्फ रजिस्ट्रेशन तिथि, वक्फ निर्माण की तिथि, प्रॉपर्टी का खाता, खसरा, पट्टा, प्लॉट नंबर सभी निल दिखाया गया है।
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प्रॉपर्टी शहर में होने के बावजूद एरिया मंडुवाडीह ग्रामीण में दर्ज बताया गया है। जिस स्थान को विशेष उपासना स्थल कानून 1991 बनने से पहले हिंदुओं का पूजा स्थल घोषित कर दिया गया, उस स्थान पर यह कानून नहीं लागू होता है। हिंदू पक्ष की ओर से हरिशंकर जैन ने अदालत में कहा कि ज्ञानवापी को वक्फ संपत्ति घोषित करना बहुत बड़ा षडयंत्र है और जनता को गुमराह किया गया है।

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'हमारे अधिकार का अतिक्रमण किया गया'

वक्फ बोर्ड में दर्ज 100 नंबर रजिस्ट्रेशन के बाबत कोई भी सबूत नहीं है। धार्मिक स्वरूप के मुद्दे पर कहा कि वेद, शास्त्र, उपनिषद, स्मृति, पुराण से साबित है कि पूरी प्रापर्टी मंदिर की है और जबरदस्ती घुस आने व नमाज पढ़ लेने से मस्जिद की संपत्ति नहीं हो जाती है। 

उन्होंने कहा कि हमारे अधिकार का अतिक्रमण किया गया। वर्ष 1993 से पूर्व ब्यास जी तहखाने में और जगह-जगह पर पूजा करते थे। बाद में बैरिकेटिंग कर जबरन रोक दिया गया। विश्वनाथ मंदिर एक्ट के सेक्सन 5 के तहत यह प्रापर्टी देवता में निहित हो गई, तब विशेष धर्म उपासना स्थल कानून लागू नहीं हो सकता।

Gyanvapi case hearing on 18th july Hindu side attacks on UP Sunni Central Waqf Board and alleging forgery in varanasi court
वाराणसी कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

दलील में कहा कि ऑर्डर 7 रूल 11 के आवेदन में जो बात कही गई है, उसी पर कोर्ट विचार करेगी, इसके इतर विपक्षी जो भी बात कहेंगे उस पर विचार का कोई औचित्य नहीं है। जिन स्थलों पर पूजा करने का अधिकार विशेष धर्म उपासना स्थल एक्ट 1991 आने से पहले पूजा का अधिकार प्राप्त था। उन स्थलों पर यह एक्ट प्रभावी नहीं है। वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने बहस पूरी कर ली और अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 18 जुलाई नियत कर दी।

तलवार से ज्यादा शक्ति कलम की होती है..

उस दिन वादिनी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह, शिवम गौड़ व अनुपम द्विवेदी बहस जारी रखेंगे। अदालत में सुनवाई के दौरान डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय, डीजीसी फौजदारी आलोक चंद्र शुक्ल, अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के अधिवक्तागण अभयनाथ यादव, रईस अहमद, वादिनी गण व उनके अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी, सुभाषनंदन चतुर्वेदी, पंकज कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।

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