Gyanvapi ASI Survey: मुस्लिम पक्ष को झटका, हिंदू पक्ष में खुशी की लहर, कोर्ट ने 4 अगस्त तक मंगाई सर्वे रिपोर्ट
Gyanvapi Mosque Case Update: वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे की याचिका को जिला जज की अदालत ने मंजूर कर लिया है। हिंदू पक्ष इस मामले को लेकर खुश है कि उनकी मांग को मान लिया गया है। वहीं कोर्ट के इस आदेश को मुस्लिम पक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी के ज्ञानवापी में सील किए वजूखाने को छोड़ कर बैरिकेडिंग के अंदर के शेष अन्य क्षेत्र का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) रडार तकनीक से सर्वे करेगा। यह आदेश शुक्रवार को मां श्रृंगार गौरी के मूल वाद पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने दिया है। कोर्ट ने 11 बिंदु पर आधारित आदेश एएसआई के निदेशक को दिया है। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर एएसआई को सर्वे कर चार अगस्त तक अदालत को रिपोर्ट देनी है। प्रकरण में सुनवाई की अगली तिथि चार अगस्त नियत की गई है।
इधर, अदालत के आदेश के साथ ही वाराणसी कोर्ट परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। हिंदू के पक्ष के वकील विष्णु जैन हों या फिर याचिकाकर्ता लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक, सभी फैसला सुनते ही झूमने लगे। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। एएसआई और वैज्ञानिक सर्वे से परिसर का सच सामने आएगा।
ये भी पढ़ें: ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष का दावा- मुख्य गुंबद के नीचे एक और शिवलिंग, बोले- आती है धप-धप की आवाज
कोर्ट का फैसला मंदिर समर्थकों के लिए टर्निंग पॉइंट
हिंदू पक्ष इस मामले को लेकर खुश है कि उनकी मांग को मान लिया गया है। हिंदू पक्ष के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने कहा कि 1984 से हम संघर्ष कर रहे थे। आज का फैसला सभी मंदिर समर्थकों के लिए टर्निंग पॉइंट है। वहीं कोर्ट के इस आदेश को मुस्लिम पक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने जिला जज के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
16 मई को आवेदन, 21 जुलाई को आदेश
ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी मुकदमे की वादिनी रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू ने बीते 16 मई को अदालत में आवेदन दिया था। कहा था कि ज्ञानवापी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सील वजूखाने को छोड़ कर वर्ष 1993 से जो क्षेत्र बैरिकेडिंग के अंदर है, उसका एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाए। आवेदन पर 19 मई को अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की तो हिंदू पक्ष ने 22 मई को अपनी दलील रखी थी। सात जुलाई को जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण 12 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई।
हिंदू पक्ष ने आवेदन के निस्तारण पर बल दिया तो मसाजिद कमेटी ने आपत्ति के लिए समय मांगा और 14 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव भी अदालत में मौजूद रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला जज की अदालत ने 14 जुलाई को आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली थी। शुक्रवार की शाम जिला जज की अदालत ने मसाजिद कमेटी की आपत्ति को खारिज करते हुए हिंदू पक्ष का आवेदन स्वीकार करते हुए एएसआई से सर्वे का आदेश दिया।
मस्जिद की पश्चिमी दीवार का सर्वे कराने से इतिहास सामने आएगा
हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में दलील दी कि सील किए गए वजूखाना को छोड़कर ज्ञानवापी के शेष अन्य स्थान का सर्वे कराया जाए। मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे धप-धप की आवाज आती है। उसके नीचे एक और शिवलिंग मिलने की संभावना है। मस्जिद की पश्चिमी दीवार और पूरे परिसर का सर्वे कराने से इतिहास सामने आएगा। अदालत बिना आवेदन के भी सर्वे का आदेश दे सकती है। ऐसा साक्ष्य एकत्र करने के लिए और मौके की स्थिति को समझने के लिए अदालत कर सकती है। एएसआई से सर्वे के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाधित नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर भी नहीं रोक लगाई है।
आवेदन को सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 19 मई से स्टे है। एएसआई सर्वे के आवेदन को सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं है। दूसरी अहम बात यह है कि इस मामले में एक बार सर्वे हो चुका है। उस पर आपत्ति भी की गई है। बगैर उसके निस्तारण के सर्वे का दूसरा आदेश नहीं दिया जा सकता। हिंदू पक्ष ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कही है, लेकिन उसका कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है।