Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी के तीन तहखानों का भी खुलेगा राज, पत्थर के टुकड़े और अन्न के दाने बताएंगे पूरी कहानी
Gyanvapi Survey: ज्ञानवापी परिसर में वैज्ञानिक तरीके से सर्वे की शुरुआत सोमवार सुबह से हो चुकी है। सर्वे में पत्थर के टुकड़े और अन्न के दाने अपने कालखंड की कहानी खुद ब खुद बताएंगे। साथ ही तहखानों का भी राज खुलेगा कि वह कब बनाए गए और उनके अंदर क्या है?
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वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक सर्वे से दुनिया के सामने इतिहास का सच सामने आ जाएगा। एएसआई की टीम सोमवार सुबह ज्ञानवापी परिसर में वैज्ञानिक तरीके से सर्वे के लिए पहुंची है। इसमें देश के कई शहरों के एएसआई के विशेषज्ञ शामिल हैं। एएसआई की 43 सदस्यीय टीम के अलावा हिंदू पक्ष की चार वादिनी महिला व उनके चार अधिवक्ता, जिला शासकीय अधिवक्ता, राज्य और केंद्र सरकार के अधिवक्ता, एडीएम सिटी और एक अपर पुलिस आयुक्त मौजूद हैं। मुस्लिम पक्ष का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की भी व्यवस्था है।
एएसआई की टीम पांच से छह दिन में पूरे परिसर का सर्वे पूरा कर सकती है। एएसआई के सर्वे में पत्थर के टुकड़े और अन्न के दाने अपने कालखंड की कहानी खुद ब खुद बताएंगे। ज्ञानवापी में तीन तहखानों के होने का दावा किया जाता है। हालांकि व्यास परिवार के लोग दो ही तहखाने बताते हैं। एएसआई के सर्वे में तहखानों का भी राज खुलेगा कि वह कब बनाए गए और उनके अंदर क्या है?
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बड़े विवाद के हल की उम्मीद भी बंधी
पिछले साल अधिवक्ता आयुक्त के सर्वे के दौरान व्यास परिवार के शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास ने कहा था कि ज्ञानवापी में दो तहखाने ही हैं। एक की चाबी उनके और प्रशासन के पास रहती है।
कलाकृतियों की सूची बनेगी
अदालत के आदेश के मुताबिक इमारत में पाई जाने वाली सभी कलाकृतियों की एक सूची तैयार की जाएगी। उन कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का पता लगाई जाएगी। इमारत की आयु, निर्माण की प्रकृति का भी पता लगाया जाएगा। जीपीआर सर्वेक्षण के साथ ही जहां भी आवश्यक होगा, वहां उत्खनन किया जाएगा।
रडार सर्वे के अलावा ट्रेंच लगाने का भी विकल्प
ज्ञानवापी परिसर की दीवार, छत सहित अन्य हिस्सों की अलग-अलग तकनीक व वैज्ञानिक तरीकों से जांच की जाएगी। रडार सर्वे की तकनीक के जरिये जमीन के नीचे तीन से चार मीटर का सर्वे किया जा सकता है। एएसआई के सामने रडार सर्वे के अलावा ट्रेंच लगाने का भी विकल्प है।
मूर्तियां और अभिलेख भी बताएंगे इतिहास
ज्ञानवापी परिसर से 50 मीटर की दूरी में भी ट्रेंच लगाकर सर्वे किया जा सकता है। इससे पता चलेगा कि यह परिसर कितने पहले आबाद हुआ होगा? कौन सी चीज सबसे पहले बनी होगी? इस दौरान मिलने वाले पत्थर के टुकड़े, अन्न के दाने, मूर्तियां, अभिलेख व हर छोटी से छोटी वस्तु भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। इससे इतिहास की जानकारी मिल जाएगी। एएसआई सापेक्ष और निरपेक्ष डेटिंग पद्धति के जरिये भी सर्वे कर सकता है।
अयोध्या में एएसआई सर्वे की रिपोर्ट बनी थी आधार
अयोध्या विवाद के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। एएसआई सर्वे की रिपोर्ट को अहम मानते हुए फैसला सुनाया था। हालांकि, ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग जैसी आकृति और वजूखाने का सर्वे नहीं हो सकेगा। शिवलिंग का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।