युवा चेतना की ओर से केदारघाट स्थित श्री करपात्री धाम में बृहस्पतिवार को नई पीढ़ी और भारत 2047 विषय पर विशेष संवाद हुआ। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि श्री करपात्री धाम भारतीय संस्कृति, सभ्यता और पौराणिक शिक्षा व्यवस्था के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। पौराणिक काल में हमारे विश्वविद्यालयों के ग्रंथों को जलाया गया, ताकि हमारी संस्कृति कमजोर हो सके, लेकिन हमारी गुरु-शिष्य परंपरा ने आक्रांताओं के मंसूबों को नाकाम किया।
स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति से भारत की सभ्यता बदलने का षड्यंत्र सफल नहीं होगा। संतों, अध्यापकों और समाज के जिम्मेदार वर्ग को नई पीढ़ी को भारतीय संस्कार परंपरा से जोड़ने के लिए अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश की प्रतिष्ठा वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती ने छात्रों और नौजवानों की समृद्धि को देश की मजबूती के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में सबका सम्मान है और सनातन मूल्यों के संरक्षण से ही संस्कृति का संवर्धन होता है। युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि भारतीय नौजवान छात्र अभिमन्यु, प्रह्लाद और श्रवण कुमार को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय पौराणिक परंपरा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 से पहले विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा।