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‘महागठबंधन’ की सियासी जमीन तैयार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 13 May 2016 01:42 AM IST
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जदयू के राजनैतिक कार्यकर्ता सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आैर वरिष्ठ पार्टी नेता शरद यादव का माल्यार्पण कर स्वागत करते पार्टीजन।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गढ़ में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न केवल गरजे बल्कि अपनी पार्टी जनता दल यूनाईटेड के ‘मिशन यूपी’ का आगाज भी किया। कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने नीतीश कुमार ने यूपी में महागठबंधन की सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं को जुटाकर इस बात का भरोसा दिलाया कि पार्टी पूरी ताकत के साथ 2017 के चुनावी महासमर में उतरेगी। सम्मेलन में जुटी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से गदगद जदयू अध्यक्ष ने एलान किया कि पार्टी सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों को एक मंच पर लाने की मुहिम जारी रखेगी।
जदयू सूत्रों की मानें तो यूपी में संगठन को संजीवनी देने के लिए सुशासन बाबू (नीतीश कुमार) ने खाका तैयार कर लिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन उसी रणनीति का हिस्सा है। मिशन यूपी के आगाज के लिए वाराणसी को भी एक रणनीति के तहत चुना गया है। मालूम हो कि मोदी और नीतीश की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं। ऐसे में पीएम के गढ़ में प्रदेश स्तर का सम्मेलन कर नीतीश कुमार ने यह जताने की कोशिश की है कि 2017 ही नहीं बल्कि 2019 में होने वाले आम चुनाव के लिए भी वह यहां यूपी में अपनी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो मिशन यूपी को लेकर नीतीश कुमार काफी संजीदा हैं। वाराणसी समेत पूरे यूपी पार्टी अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के लिए पार्टी के राष्ट्रीय नेता वाराणसी में कैंप करेंगे। फिलहाल पार्टी यहीं से यूपी चुनाव की तैयारियों को संचालित करेगी। बताया जा रहा है कि संगठन की बिहार इकाई के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को यूपी चुनाव की जिम्मेेदारी सौंपी जा सकती है। नीतीश कुमार के यूपी में जल्द ही कुछ और दौरे भी हो सकते हैं।
बहरहाल, सुशासन बाबू ने अपनी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, केसी त्यागी, अरुण श्रीवास्तव, आफाक अहमद, वशिष्ठ नारायण व अली अनवर को यहां लाकर यह बता दिया है कि यूपी फतह करने के बाद दिल्ली भी फतह किया जा सकता है। सम्मेलन में भीड़ जुटाकर भाजपा को यह संदेश देने की कोशिश हुई कि महागठबंधन यूपी में बड़ी ताकत बनकर आ रहा है। हालांकि गठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल होंगे, इस बारे में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के अलावा कई छोटे दलों के साथ जदयू का गठबंधन होगा। सपा, बसपा और भाजपा से दूरी बनी रहेगी। सूबे की कई क्षेत्रीय पार्टियां महागठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार हैं। कुछ लोग तो पार्टी में भी शामिल होना चाहते हैं। बता दें कि वाराणसी में लंका, रोहनिया, रामनगर आदि इलाकों में 25 हजार से ज्यादा बिहारी रहते हैं।
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नीतीश कुमार ने यूपी के पार्टी अध्यक्ष सुरेश निरंजन और कार्यक्रम के संयोजक पूर्व विधायक सतीश कुमार समेत तैयारियों को अंतिम रूप देने वाले सभी नेताओं की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में उम्मीद से अधिक लोग पहुंचे हैं। पार्टी के लोगों ने काफी मेहनत की है। उन्हें अपना यह जोश कायम रखना होगा। हमें इस लड़ाई को और आगे ले जाना है। सम्मेलन में शामिल होने के लिए चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, मिर्जापुर, बलिया, गोरखपुर, बस्ती समेत कई जिलों के लोग आए थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रोटोकाल से पहले ही वाराणसी पहुंच गए। प्रोटोकाल के मुताबिक उन्हें दोपहर बाद 1:30 बजे सड़क मार्ग से सर्किट हाउस पहुंचना था। यहां कुछ देर विश्राम के बाद 2:15 बजे पिंडरा के नेशनल इंटर कॉलेज पहुंचना था। नीतीश निर्धारित समय से करीब एक घंटा पहले 12:25 बजे ही सर्किट हाउस पहुंच गए। यहां वह सीधे शरद यादव से मिलने उनके कमरे में गए। कुछ देर तक दोनों नेताओं ने गुफ्तगू की। फिर 12:45 बजे दोनों नेता सर्किट हाउस से पिंडरा के लिए निकल गए। 1:15 बजे दोनों नेता कार्यक्रम स्थल पहुंचे।
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जदयू सूत्रों की मानें तो यूपी में संगठन को संजीवनी देने के लिए सुशासन बाबू (नीतीश कुमार) ने खाका तैयार कर लिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन उसी रणनीति का हिस्सा है। मिशन यूपी के आगाज के लिए वाराणसी को भी एक रणनीति के तहत चुना गया है। मालूम हो कि मोदी और नीतीश की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं। ऐसे में पीएम के गढ़ में प्रदेश स्तर का सम्मेलन कर नीतीश कुमार ने यह जताने की कोशिश की है कि 2017 ही नहीं बल्कि 2019 में होने वाले आम चुनाव के लिए भी वह यहां यूपी में अपनी जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो मिशन यूपी को लेकर नीतीश कुमार काफी संजीदा हैं। वाराणसी समेत पूरे यूपी पार्टी अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के लिए पार्टी के राष्ट्रीय नेता वाराणसी में कैंप करेंगे। फिलहाल पार्टी यहीं से यूपी चुनाव की तैयारियों को संचालित करेगी। बताया जा रहा है कि संगठन की बिहार इकाई के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को यूपी चुनाव की जिम्मेेदारी सौंपी जा सकती है। नीतीश कुमार के यूपी में जल्द ही कुछ और दौरे भी हो सकते हैं।
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बहरहाल, सुशासन बाबू ने अपनी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, केसी त्यागी, अरुण श्रीवास्तव, आफाक अहमद, वशिष्ठ नारायण व अली अनवर को यहां लाकर यह बता दिया है कि यूपी फतह करने के बाद दिल्ली भी फतह किया जा सकता है। सम्मेलन में भीड़ जुटाकर भाजपा को यह संदेश देने की कोशिश हुई कि महागठबंधन यूपी में बड़ी ताकत बनकर आ रहा है। हालांकि गठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल होंगे, इस बारे में उन्होंने कोई खुलासा नहीं किया। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के अलावा कई छोटे दलों के साथ जदयू का गठबंधन होगा। सपा, बसपा और भाजपा से दूरी बनी रहेगी। सूबे की कई क्षेत्रीय पार्टियां महागठबंधन का हिस्सा बनने को तैयार हैं। कुछ लोग तो पार्टी में भी शामिल होना चाहते हैं। बता दें कि वाराणसी में लंका, रोहनिया, रामनगर आदि इलाकों में 25 हजार से ज्यादा बिहारी रहते हैं।
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नीतीश कुमार ने यूपी के पार्टी अध्यक्ष सुरेश निरंजन और कार्यक्रम के संयोजक पूर्व विधायक सतीश कुमार समेत तैयारियों को अंतिम रूप देने वाले सभी नेताओं की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में उम्मीद से अधिक लोग पहुंचे हैं। पार्टी के लोगों ने काफी मेहनत की है। उन्हें अपना यह जोश कायम रखना होगा। हमें इस लड़ाई को और आगे ले जाना है। सम्मेलन में शामिल होने के लिए चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, मिर्जापुर, बलिया, गोरखपुर, बस्ती समेत कई जिलों के लोग आए थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रोटोकाल से पहले ही वाराणसी पहुंच गए। प्रोटोकाल के मुताबिक उन्हें दोपहर बाद 1:30 बजे सड़क मार्ग से सर्किट हाउस पहुंचना था। यहां कुछ देर विश्राम के बाद 2:15 बजे पिंडरा के नेशनल इंटर कॉलेज पहुंचना था। नीतीश निर्धारित समय से करीब एक घंटा पहले 12:25 बजे ही सर्किट हाउस पहुंच गए। यहां वह सीधे शरद यादव से मिलने उनके कमरे में गए। कुछ देर तक दोनों नेताओं ने गुफ्तगू की। फिर 12:45 बजे दोनों नेता सर्किट हाउस से पिंडरा के लिए निकल गए। 1:15 बजे दोनों नेता कार्यक्रम स्थल पहुंचे।