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राज्यपाल बोले, दिन में देखें सपने और उन्हें करें साकार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 25 Nov 2015 02:08 AM IST
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प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मंगलवार को यहां कहा कि युवाओं से ही देश की पहचान है। आने वाला दिन युवाओं का है। इसी गति से अगर युवाओं की संख्या बढ़ी तो 2020 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवा देश माना जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, रात नहीं बल्कि दिन में सपने देखें और उसे साकार करने का संकल्प लें। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 37वें दीक्षांत समारोह में राम नाईक ने कहा कि चाहे वह कोई भी सपना हो, उसे बिना अटूट मेहनत के साकार नहीं किया जा सकता। सपनों को साकार करने के लिए सतत परिश्रम जरूरी है।
समारोह में राज्यपाल ने 51 मेधावियों और तीन खिलाड़ियों समेत कुल 54 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान 18 विभागों के 78 विद्यार्थियों को शोध उपाधि दी गई, जिसमें एक डी.लिट भी शामिल रहा। इसके अलावा, स्नातक, स्नातकोत्तर में 98965 मेधावियों को उपाधि दी गई।
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कुलाधिपति ने कहा कि काशी विद्यापीठ का नाम सोने जैसा चमकाएं। अब वह समय आ गया है जब विद्यापीठ परिसर से निकल कर खुले आकाश में उड़ान भरिए। खुली दुनिया का आकाश इतना बड़ा है, जितना उड़ चाहो उड़ सकते हो।
जीवन में प्रतिस्पर्धा बहुत है, इसके लिए सतत परिश्रम करते रहने की जरूरत है क्योंकि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान उन्होंने विद्यापीठ की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त, आचार्य नरेंद्र देव, पुरुषोत्तम दास टंडन जैसी विभूतियों के योगदान की चर्चा की
विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर आजाद आदि का भी जिक्र किया। उधर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस समय सही इतिहास को सामने लाने की जरूरत है, इसके लिए इतिहास के पुर्नलेखन की आवश्यकता है, जिससे कि लोगों को सही जानकारी मिल सके।
अभिनेता आमिर खान के असहिष्णुता वाले बयान पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक है, इस पर कुछ नहीं बोल सकता। समारोह में कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग, कुलसचिव ओम प्रकाश के अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे, महापौर राम गोपाल मोहले, विधायक श्याम नारायण चौधरी, रविंद्र जायसवाल, काशिराज परिवार के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह, राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त के परिवारीजन मौजूद रहे।
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उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, रात नहीं बल्कि दिन में सपने देखें और उसे साकार करने का संकल्प लें। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 37वें दीक्षांत समारोह में राम नाईक ने कहा कि चाहे वह कोई भी सपना हो, उसे बिना अटूट मेहनत के साकार नहीं किया जा सकता। सपनों को साकार करने के लिए सतत परिश्रम जरूरी है।
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समारोह में राज्यपाल ने 51 मेधावियों और तीन खिलाड़ियों समेत कुल 54 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान 18 विभागों के 78 विद्यार्थियों को शोध उपाधि दी गई, जिसमें एक डी.लिट भी शामिल रहा। इसके अलावा, स्नातक, स्नातकोत्तर में 98965 मेधावियों को उपाधि दी गई।
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कुलाधिपति ने कहा कि काशी विद्यापीठ का नाम सोने जैसा चमकाएं। अब वह समय आ गया है जब विद्यापीठ परिसर से निकल कर खुले आकाश में उड़ान भरिए। खुली दुनिया का आकाश इतना बड़ा है, जितना उड़ चाहो उड़ सकते हो।
जीवन में प्रतिस्पर्धा बहुत है, इसके लिए सतत परिश्रम करते रहने की जरूरत है क्योंकि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान उन्होंने विद्यापीठ की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त, आचार्य नरेंद्र देव, पुरुषोत्तम दास टंडन जैसी विभूतियों के योगदान की चर्चा की
विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर आजाद आदि का भी जिक्र किया। उधर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि इस समय सही इतिहास को सामने लाने की जरूरत है, इसके लिए इतिहास के पुर्नलेखन की आवश्यकता है, जिससे कि लोगों को सही जानकारी मिल सके।
अभिनेता आमिर खान के असहिष्णुता वाले बयान पर सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक है, इस पर कुछ नहीं बोल सकता। समारोह में कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग, कुलसचिव ओम प्रकाश के अलावा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे, महापौर राम गोपाल मोहले, विधायक श्याम नारायण चौधरी, रविंद्र जायसवाल, काशिराज परिवार के प्रतिनिधि अनंत नारायण सिंह, राष्ट्र रत्न शिव प्रसाद गुप्त के परिवारीजन मौजूद रहे।