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बहुमंजिले सरकारी दफ्तरों में बनेंगे रैंप, लगेंगे एस्केलेटर

Sun, 17 Jan 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 17 Jan 2016 02:16 AM IST
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Government offices will be in multi ramp , take the escalator
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि देश के 50 शहरों के सौ से अधिक बहुमंजिले सरकारी दफ्तरों (विशेष रूप से कलेक्ट्रेट और पेंशन कार्यालय), रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सरकारी अस्पतालों में विकलांगों की सहूलियत के लिए रैंप बनाए जाएंगे। साथ ही, स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) लगाई जाएंगी। जिला और तहसील स्तर पर सरकारी अस्पतालों में रैंप बनने से विकलांगों के साथ ही गर्भवती महिलाओं और मरीजों को राहत होगी।
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शनिवार की दोपहर डीरेका मैदान पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने 22 जनवरी को यहां आयोजित होने वाले सामाजिक न्याय अधिकारिता सम्मेलन की पूरी रूपरेखा बताई। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के आठ हजार विकलांगों को आठ करोड़ रुपये के उपकरण बांटेंगे। डेढ़ साल में देश भर में इस तरह के 93 शिविर आयोजित हो चुके हैं। 22 जनवरी को डीरेका मैदान पर आयोजित होने वाला शिविर अब तक का सबसे बड़ा शिविर होगा। इस शिविर में लाभान्वित होने से वंचित संसदीय क्षेत्र के विकलांगों को बाद में ब्लाक स्तर पर शिविर लगाकर उनकी जरूरत के उपकरण बांटे जाएंगे।
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गहलोत ने बताया कि पीएम अपने हाथों से लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रानिक छड़ी, बैटरी चालित रिक्शा और ट्राइसाइकल बांटेंगे। बताया कि सुगम्य भारत योजना के तहत देश भर के साढ़े तीन लाख विकलांग अब तक लाभान्वित हो चुके हैं। एक सवाल के जवाब में गहलोत ने कहा कि उपकरण वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। लाभार्थियों का पूरा ब्यौरा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है।
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केंद्रीय मंत्री गहलोत ने कहा कि वाराणसी में शिविर लगाकर विकलांगों को उपकरण बांटने के पीछे कोई सियासी फायदे वाली बात नहीं है। इस अभियान को 2017 में यूपी में होने वाले चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। विकलांगों की मदद कर उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ना ही इस पूरे अभियान का एकमात्र मकसद है।




विकलांगों के पेंशन भुगतान से जुड़े एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकलांगों को तीन सौ रुपये प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान है। पंजीकृत पेंशनधारियों का पूरा पैसा केंद्र ने राज्य सरकारों को भेज दिया है। पेंशन भुगतान की जिम्मेदारी अब राज्य सरकार की है। यदि राज्य सरकार की ओर से पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है तो निश्चित ही यह गंभीर मामला है। मैं खुद इस मामले में राज्य सरकार से बात करूंगा।
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