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राजभाषा सम्मेलन में बोले राज्यपाल, देश के सशक्तिकरण में हिंदी का महत्वपूर्ण योगदान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 09 Feb 2018 08:12 PM IST
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डीरेका में आयोजित हुआ राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने ने कहा कि राष्ट्रीयता और सशक्तिकरण में हिंदी का बहुत योगदान है। किसी भी देश की भाषा राष्ट्र और समाज की आत्मा होती है। हिंदी विश्व में मजबूत हो रही है। लिखने और बोलने में जितना अंतर कम होगा भाषा उतनी ही मजबूत होगी।
यह बात राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि शुक्रवार को डीरेका में आयोजित राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह (उत्तर एक और उत्तर दो क्षेत्र) में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी के उपयोग में नए शब्दों का निर्माण, प्रचार प्रसार स्वप्रेरणा और स्वेच्छा से होना चाहिए।
इस मौके पर उन्होंने अपनी पुस्तक ‘चरैवती-चरैवती’ के सार को समझाया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी में विशिष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर गौतमी ‘पत्रिका’ का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में नौ प्रदेशों के लोग शामिल रहे।
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इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश राजीव कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिवालय को ई-ऑफिस में बदला जा रहा है। 31 मार्च तक लखनऊ का सचिवालय हिंदी में काम करने लगेगा।
उन्होंने बताया कि हिंदी को मजबूती प्रदान करने में फिल्मों का भी सशक्त योगदान रहा है। उन्होंने हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अभियान चलाने की बात कही। इस दौरान उन्होंने कुछ संस्मरण भी सुनाए।
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यह बात राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि शुक्रवार को डीरेका में आयोजित राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह (उत्तर एक और उत्तर दो क्षेत्र) में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिंदी के उपयोग में नए शब्दों का निर्माण, प्रचार प्रसार स्वप्रेरणा और स्वेच्छा से होना चाहिए।
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इस मौके पर उन्होंने अपनी पुस्तक ‘चरैवती-चरैवती’ के सार को समझाया। कार्यक्रम के दौरान हिंदी में विशिष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर गौतमी ‘पत्रिका’ का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम में नौ प्रदेशों के लोग शामिल रहे।
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इससे पूर्व विशिष्ट अतिथि मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश राजीव कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिवालय को ई-ऑफिस में बदला जा रहा है। 31 मार्च तक लखनऊ का सचिवालय हिंदी में काम करने लगेगा।
उन्होंने बताया कि हिंदी को मजबूती प्रदान करने में फिल्मों का भी सशक्त योगदान रहा है। उन्होंने हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अभियान चलाने की बात कही। इस दौरान उन्होंने कुछ संस्मरण भी सुनाए।
नकल पर सख्ती को लेकर दिया बड़ा बयान
राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह
- फोटो : अमर उजाला
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने अपना कर्त्तव्य निभाया, विपक्ष ने जो किया उसे पूरे प्रदेश ने देखा। यूपी की जनता विपक्ष का मूल्यांकन करेगी। राज्यपाल राम नाईक ने बोर्ड की परीक्षाओं से जुड़े सवाल पर कहा कि सरकार का संकल्प स्वागतयोग्य है।
नकल माफियाओं की वजह से यूपी की शिक्षा को संदिग्ध और संदेह भरी नजरों से देखा जाता था। गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए नकल रोकना जरूरी हो गया था। अंग्रेजी में शिक्षा लेने की होड़ से हिंदी की शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।
50 हजार से ज्यादा छात्रों के हिंदी की परीक्षा छोड़ने पर राज्यपाल ने कहा कि चीन से सबक लेने की जरूरत है। परीक्षा छोड़ना बड़ी चिंता है। हिंदी में अच्छी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश राजीव कुमार ने कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि कर्मचारी नियमावली के अनुसार अपनी आय घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है और हम काफी आगे निकल आए हैं।
नकल माफियाओं की वजह से यूपी की शिक्षा को संदिग्ध और संदेह भरी नजरों से देखा जाता था। गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए नकल रोकना जरूरी हो गया था। अंग्रेजी में शिक्षा लेने की होड़ से हिंदी की शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है।
50 हजार से ज्यादा छात्रों के हिंदी की परीक्षा छोड़ने पर राज्यपाल ने कहा कि चीन से सबक लेने की जरूरत है। परीक्षा छोड़ना बड़ी चिंता है। हिंदी में अच्छी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश राजीव कुमार ने कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के एक सवाल पर कहा कि कर्मचारी नियमावली के अनुसार अपनी आय घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है और हम काफी आगे निकल आए हैं।
बनारस हिंदी का कारखाना
राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह
- फोटो : अमर उजाला
राजभाषा सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता कर रहे सचिव राजभाषा विभाग प्रभास कुमार झा ने कहा कि बनारस हिंदी का कारखाना है। उन्होंने जयशंकर प्रसाद और उनकी रचना कामायनी पर प्रकाश डाला। प्रेमचंद के गोदान और पराड़कर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि इस साल के अंत तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं में कोर बैंकिंग सोल्यूशन की सुविधा लेकर आ रहे हैं। इसके माध्यम से ई-बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम, पासबुक में विभिन्न भाषाओं के विकल्प रहेंगे।
मंत्रालय और आरबीआई के सहयोग से बैंकिंग सेवाओं का बहुभाषीकरण किया जा रहा है। उन्होंने हिंदी में कंटेंट को बढ़ावा देने और उच्चस्तरीय अनुवादकों की जरूरत पर बल दिया। 20 अगस्त को मारीशस में आयोजित हिंदी सम्मेलन में हिंदी एप लांच की बात कही।