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राज्यपाल राम नाईक की शिक्षकों से अपील, बच्चों को न बनाएं किताबी कीड़ा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 20 Aug 2017 09:20 PM IST
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सत्यमेव जयते न्यास की ओर से बीएचयू के केएन उडप्पा सभागार में परिचर्चा
- फोटो : अमर उजाला
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राज्यपाल राम नाईक ने शिक्षकों से अपील की है कि बच्चों को किताबी कीड़ा न बनाएं। उन्हें व्यावहारिक ज्ञान भी कराया जाए। जीवन में शिक्षा का बड़ा महत्व है और शिक्षकों की भूमिका बेहद अहम है। शिक्षकों की संस्कार क्षमता का भी मूल्यांकन होना चाहिए।
राज्यपाल रविवार को यहां सत्यमेव जयते न्यास की ओर से बीएचयू के केएन उडप्पा सभागार में आयोजित राष्ट्र के निर्माण और विकास में शिक्षालयों की भूमिका विषयक परिचर्चा को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित कर रहे थे।
परिचर्चा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान करने वाले 15 लोगों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया।
राष्ट्र के निर्माण और विकास में शिक्षालयों की भूमिका को बेहद अहम बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
आज भारत दुनिया का सबसे अधिक युवाओं का देश है। युवाओं को सृजन और विकास से जोड़कर हमें राष्ट्रनिर्माण को गति देनी होगी। आज आतंकवाद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे चुनौती के रूप में लेते हुए नौजवानों को सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
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विश्वविद्यालयों में सत्र नियमित करने के दृष्टिकोण से समय से दीक्षांत समारोह कराने पर भी बल दिया। अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के योगदान को अहम बताया।
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राज्यपाल रविवार को यहां सत्यमेव जयते न्यास की ओर से बीएचयू के केएन उडप्पा सभागार में आयोजित राष्ट्र के निर्माण और विकास में शिक्षालयों की भूमिका विषयक परिचर्चा को बतौर मुख्यअतिथि संबोधित कर रहे थे।
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परिचर्चा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान करने वाले 15 लोगों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया।
राष्ट्र के निर्माण और विकास में शिक्षालयों की भूमिका को बेहद अहम बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
आज भारत दुनिया का सबसे अधिक युवाओं का देश है। युवाओं को सृजन और विकास से जोड़कर हमें राष्ट्रनिर्माण को गति देनी होगी। आज आतंकवाद देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसे चुनौती के रूप में लेते हुए नौजवानों को सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
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विश्वविद्यालयों में सत्र नियमित करने के दृष्टिकोण से समय से दीक्षांत समारोह कराने पर भी बल दिया। अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के योगदान को अहम बताया।