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बेकार पड़े इलेक्ट्रानिक गैजेट्स से तैयार हो सकता है सोना, देश के इस संस्थान में चल रहा काम
Wed, 09 Jan 2019 03:39 PM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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Published by: shashikant misra
Updated Wed, 09 Jan 2019 03:39 PM IST
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घर में बेकार पड़े इलेक्ट्रानिक उपकरण (मोबाइल, लैपटॉप, चार्जर, डेस्कटॉप आदि) उपयोगी भी है। बस उसका सही तरह से निस्तारण करने की जरूरत होती है। एक टन ई-कचरा के निस्तारण से 300 ग्राम तक सोना तैयार किया जा सकता है।
आईआईटी बीएचयू मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग और स्काटलैंड विश्वविद्यालय की टीम ने इस पर काम शुरू किया है। मंगलवार को व्याख्यान के बाद प्रेस कांफ्रेंस में इसकी जानकारी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के डॉ. कैरोल और आईआईटी बीएचयू के प्रो. केके सिंह ने दी।
ई-कचरा निस्तारण के लिए यूजीसी और यूनाइटेड किंगडम के ब्रिटिश काउंसिल के संयुक्त तत्वाधान में आईआईटी बीएचयू और स्कॉटलैंड के बीच समझौते के बाद से इस पर काम चल रहा है। स्काटलैंड से आए प्रो. जैसन और डॉ. कैरोल ने बताया कि ई-कचरे से बहुमूल्य धातुएं भी प्राप्त होती हैं, लेकिन इनका निस्तारण कठिन है।
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इसमें मोबाइल सहित अन्य उपकरणों में मौजूद पीसीबी (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड) की भूमिका अधिक होती है। उन्होंने बताया कि ऐसे में रसायन मॉडलिंग की उपयोगिता बढ़ जाती है और इसी माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। व्याख्यान में प्रो. जैसन ने शहरी खनन, सर्कुलर इकॉनामी पर कहा कि इसके माध्यम से ई-कचरा में उपस्थित लगभग सभी तत्वों को दुबारा प्राप्त किया जा सकता है।
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आईआईटी बीएचयू मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग और स्काटलैंड विश्वविद्यालय की टीम ने इस पर काम शुरू किया है। मंगलवार को व्याख्यान के बाद प्रेस कांफ्रेंस में इसकी जानकारी स्कॉटलैंड विश्वविद्यालय के डॉ. कैरोल और आईआईटी बीएचयू के प्रो. केके सिंह ने दी।
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ई-कचरा निस्तारण के लिए यूजीसी और यूनाइटेड किंगडम के ब्रिटिश काउंसिल के संयुक्त तत्वाधान में आईआईटी बीएचयू और स्कॉटलैंड के बीच समझौते के बाद से इस पर काम चल रहा है। स्काटलैंड से आए प्रो. जैसन और डॉ. कैरोल ने बताया कि ई-कचरे से बहुमूल्य धातुएं भी प्राप्त होती हैं, लेकिन इनका निस्तारण कठिन है।
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इसमें मोबाइल सहित अन्य उपकरणों में मौजूद पीसीबी (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड) की भूमिका अधिक होती है। उन्होंने बताया कि ऐसे में रसायन मॉडलिंग की उपयोगिता बढ़ जाती है और इसी माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। व्याख्यान में प्रो. जैसन ने शहरी खनन, सर्कुलर इकॉनामी पर कहा कि इसके माध्यम से ई-कचरा में उपस्थित लगभग सभी तत्वों को दुबारा प्राप्त किया जा सकता है।
2020 तक तकनीक विकसित करने पर हो रहा काम
एक अध्ययन के मुताबिक, सामान्य खदान में सोने का प्राकृतिक अयस्क एक टन में 1-5 ग्राम होता है, वहीं ई-कचरा की क्षमता 300 ग्राम सोना उत्पन्न करने की है। आईआईटी बीएचयू के प्रो. कमलेश सिंह ने बताया कि टीम रिसाइकिलिंग की 2020 तक नवीन तकनीक विकसित करने पर काम कर रही है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ न्यूनतम अपशिष्ट उत्पन्न करेगी।
मुंबई की एक संस्था के सहयोग से ई-कचरे को इकट्ठा कराकर उसका निस्तारण कराने की योजना है। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. एन के मुखोपाध्याय, प्रो. वकील सिंह, प्रो.आरके मंडल सहित कई छात्र मौजूद रहे।
मुंबई की एक संस्था के सहयोग से ई-कचरे को इकट्ठा कराकर उसका निस्तारण कराने की योजना है। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. एन के मुखोपाध्याय, प्रो. वकील सिंह, प्रो.आरके मंडल सहित कई छात्र मौजूद रहे।