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प्रकृति स्वरूप हैं भगवान, रक्षा करना नैतिक कर्तव्य: वैष्णवदास

Sat, 14 Feb 2026 02:22 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Feb 2026 02:22 AM IST
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God is the form of nature, protecting him is a moral duty: Vaishnavdas
शिव मंदिर प्रतापपुर में जगत के कल्याण के लिए हो रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शुक्रवार को रामानुज वैष्णवदास महाराज ने कहा कि जगत ही भगवान का स्वरूप है। भगवान स्वयं प्रकृति पुरुष हैं। इसलिए प्रकृति के प्रति समर्पण की भावना हर मनुष्य में होनी चाहिए। रामानुज वैष्णवदास महाराज ने कहा कि हमारे में भी गुण दोष हो सकता है, लेकिन दोष भी भगवान शिव जैसा होना चाहिए। अवगुण स्वरूप होने के बाद भी भगवान शिव पूजनीय हैं। क्योंकि, जगत के कल्याण के लिए उन्होंने विषपान किया। जो अपने परिवार के लिए त्याग करता है वह साधारण व्यक्ति नहीं हो सकता। मानव का परम लक्ष्य मानव कल्याण होना चाहिए। आरती से कथा को विराम दिया। यमजान में रुद्र प्रकाश सिंह, बृजेश यादव, आशू मिश्रा, अजय कुमार सिंह, बबलू सिंह, बच्चा सिंह, बच्चा पांडेय, निरंकार आदि रहे।
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