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बेहद जरूरी हो तभी घरों से निकलें, बरतें सावधानी
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जमीयत उलेमा पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी हाफिज ओबैदुल्लाह ने आमजन और मुस्लिम बंधुओं से अपील की है कि बेहद जरूरी हो तभी घरों से बाहर निकलें। मंगलवार को उन्होंने अपील जारी करते हुए कहा कि इस समय हमारा देश, प्रदेश और शहर भयानक त्रासदी के दौर से गुजर रहा है। अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं। आईसीयू में जगह नहीं है। वेंटीलेटर और ऑक्सीजन के अभाव में मरीज अपने चहेतों की गोद में तड़प तड़प कर दम तोड़ दे रहे हैं। इन हालात में आम जनता की जिम्मेदारियां और भी बढ़ जाती हैं। हाफिज ओबैदुल्लाह ने कहा कि सभी से यह अपील है कि घर से बाहर अतिआवश्यक होने पर ही मास्क पहन कर निकलें। बिना मास्क के हम कहीं भी न जाएं चाहे वो मार्केट हो या धर्मस्थल, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर कतई न जाएं। छोटे बच्चे एवं बूढ़े व्यक्ति नमाज के लिए मस्जिद में न जाएं। जिन व्यक्तियों को सर्दी, बुखार या नजला वगैरह हो वो मस्जिद में कतई न जाएं। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का हर हाल में पालन करें। यदि किसी व्यक्ति के अंदर कोरोना के लक्षण दिखाई दें तो वह तुरंत किसी डॉक्टर से परामर्श लें। खुद को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग कर लें। हम सभी से अपील है की इस वक्त रमजान का मुबारक महीना चल रहा है सभी लोग अपने घर पर रहकर ही ज्यादा से ज्यादा इबादत और दुआ करें कि अल्लाह ताला इस मुबारक महीने की बरकत से पूरी इंसानियत को इस मज से निजात अता फरमाएं। नमाज, रोजा, तरावीह इत्यादि के सिलसिले में उलेमा इकराम से शरई रहनुमाई हासिल करने के लिए जमीयत उलमा ए बनारस से रहनुमाई हासिल की जा सकती है।
सब्र, सच, जकात, अमन और नेकी का नाम है रोजा
वाराणसी। कोरोना संक्रमण के बीच मुकद्दस रमजान का सिलसिला अनवरत जारी है। घरों में खुदा की इबादत और तरावीह का सिलसिला अपने नियत समय से चल रहा है। मंगलवार को इफ्तारी के वक्त दस्तरखान बिछाया गया। मंगलवार को शहर की मस्जिदों में तरावीह का दौर कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया। इस दौरान मौलाना अबु सईद कासमी ने कहा कि रब ने हम सबको रमजान के महीने में अपने बंदों के लिए जो-जो रहमतें नाजिल की हैं, हम सब उसकातसव्वुर भी नहीं कर सकते। रमजान में एक माह का रोजा हम पर फर्ज किया गया है। रोजे के माने ये हैं कि अपने अंदर बदलाव लाना, खुद पर नियंत्रण रखना। रमजान नाम सब्र का है, सच का है, जकात का है, अमन और नेकी का है।
रमजान में वो सारे काम होते हैं जिससे रब और उसका रसूल खुश होता है। इसलिए ऐ रोजेदारों अल्लाह और उसके रब को राजी करना चाहते हो तो हराम चीजों से,
दुनियावी चीजों से बचते हुए तकवा आखितयार करो, नेकी के रास्ते पर चलो और रोजा रखो। रोजे में तीन चीजों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। अब यह देखें कि यह तीनों चीजें ऐसी हैं जो हमारे लिए जायज और हलाल हैं। अब रोजे के दौरान आप इन हलाल और जायज चीजों से तो परहेज कर रहे हैं, न खा रहे हैं न पी रहे है
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लेकिन जो चीजें पहले से हमारे लिए हराम थीं यानी झूठ बोलना, ग़ीबत करना, बदनिगाही करना। यह सब चीजें पहले से हमारे लिए जायज नही थीं, हराम थीं।
हदीस शरीफ में नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहे वसलम ने इरशाद फ रमाया है कि अल्लाह तआला फरमाता है कि जो शख्स रोजे की हालत में झूठ बोलना न छोड़े तो मुझे ऐसे शख्स का भूखा और प्यासा रहने की कोई जरूरत नहीं है। बहरहाल अल्लाह तआला हम सबको सही माने में रोजा रखने की तौफीक अता फरमाएं, नेकी की राह दिखाएं।
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सब्र, सच, जकात, अमन और नेकी का नाम है रोजा
वाराणसी। कोरोना संक्रमण के बीच मुकद्दस रमजान का सिलसिला अनवरत जारी है। घरों में खुदा की इबादत और तरावीह का सिलसिला अपने नियत समय से चल रहा है। मंगलवार को इफ्तारी के वक्त दस्तरखान बिछाया गया। मंगलवार को शहर की मस्जिदों में तरावीह का दौर कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया। इस दौरान मौलाना अबु सईद कासमी ने कहा कि रब ने हम सबको रमजान के महीने में अपने बंदों के लिए जो-जो रहमतें नाजिल की हैं, हम सब उसकातसव्वुर भी नहीं कर सकते। रमजान में एक माह का रोजा हम पर फर्ज किया गया है। रोजे के माने ये हैं कि अपने अंदर बदलाव लाना, खुद पर नियंत्रण रखना। रमजान नाम सब्र का है, सच का है, जकात का है, अमन और नेकी का है।
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रमजान में वो सारे काम होते हैं जिससे रब और उसका रसूल खुश होता है। इसलिए ऐ रोजेदारों अल्लाह और उसके रब को राजी करना चाहते हो तो हराम चीजों से,
दुनियावी चीजों से बचते हुए तकवा आखितयार करो, नेकी के रास्ते पर चलो और रोजा रखो। रोजे में तीन चीजों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। अब यह देखें कि यह तीनों चीजें ऐसी हैं जो हमारे लिए जायज और हलाल हैं। अब रोजे के दौरान आप इन हलाल और जायज चीजों से तो परहेज कर रहे हैं, न खा रहे हैं न पी रहे है
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लेकिन जो चीजें पहले से हमारे लिए हराम थीं यानी झूठ बोलना, ग़ीबत करना, बदनिगाही करना। यह सब चीजें पहले से हमारे लिए जायज नही थीं, हराम थीं।
हदीस शरीफ में नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहे वसलम ने इरशाद फ रमाया है कि अल्लाह तआला फरमाता है कि जो शख्स रोजे की हालत में झूठ बोलना न छोड़े तो मुझे ऐसे शख्स का भूखा और प्यासा रहने की कोई जरूरत नहीं है। बहरहाल अल्लाह तआला हम सबको सही माने में रोजा रखने की तौफीक अता फरमाएं, नेकी की राह दिखाएं।