UP: सरकारी स्कूलों में छात्राओं ने उगाईं सब्जियां, अब मिड-डे मील की थाली में परोसी जाएगी अपनी मेहनत की फसल
Varanasi News: वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों में छात्राओं ने सब्जियां उगाईं। ऐसे में अब मिड-डे मील की थाली में अपनी मेहनत की फसल परोसी जाएगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी जिले के चोलापुर ब्लॉक के परिषदीय विद्यालयों ने शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखी है। ब्लॉक के तीन विद्यालयों में छात्राओं ने न केवल बीज बोए, बल्कि मिट्टी तैयार करने से लेकर जैविक खाद डालने और समय-समय पर सिंचाई करने तक की पूरी जिम्मेदारी संभाली।
शासन की लर्निंग बाई डुइंग यानी करके सीखना योजना के तहत कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पठखौली, पूर्व माध्यमिक विद्यालय, भदवा और पूर्व माध्यमिक विद्यालय, निया की छात्राओं ने विद्यालय परिसर की खाली जमीन को उपजाऊ बनाकर वहां हरी सब्जियों की लहलहाती फसल तैयार की। इससे इन विद्यालयों के बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) में बाजार की रसायनों वाली सब्जियों के बजाय अपने ही स्कूल की क्यारियों में उगीं ताजी और जैविक सब्जियां खाने मिलेंगी।
इसे भी पढ़ें; BHU: आयुर्वेद विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में 235 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, 13 विद्वान हुए सम्मानित
शिक्षकों के तकनीकी मार्गदर्शन से उगाई गईं सब्जियों में पालक, बैंगन, टमाटर, मिर्च और अन्य मौसमी फसलें शामिल हैं। मिड-डे मील में पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए परिषदीय विद्यालयों में पोषण वाटिका बनाने का निर्देश भी दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग में यह न्यूट्रिशन गार्डन (पोषण वाटिका) मील का पत्थर साबित हो रहा है। पूरी तरह से रसायनों और कीटनाशकों से मुक्त होने के कारण यह सब्जियां बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभदायक हैं।
क्या बोले अधिकारी
इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक जीवन के कौशल से जोड़ना है। लर्निंग बाई डुइंग पद्धति से छात्राएं कृषि विज्ञान, पौधों के जीवन चक्र और पर्यावरण संरक्षण को बारीकी से समझ रही हैं। -नागेंद्र सरोज, खंड शिक्षाधिकारी, चोलापुर