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गाजीपुर के श्रीराम बने कानपुर के प्रांत प्रचारक, 1990 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हुए थे समर्पित

Mon, 16 Mar 2020 04:03 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 16 Mar 2020 04:03 PM IST
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ghazipur ShriRam of became rss promoter of Kanpur province
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।

गाजीपुर जिले के जखनियां क्षेत्र के सिद्धपीठ हथियाराम व भुड़कुडा की धरती कहे जाने वाली मंझनपुर गांव में साधारण किसान लालजी सिंह के पुत्र श्रीराम सिंह को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कानपुर प्रांत प्रचारक का दायित्व सौंपा गया। इस खबर को सुनते ही उनके मूल महावीर प्रभात शाखा के स्वयं सेवकों सहित गांव के लोग काफी खुश हैं।

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इससे पहले श्रीराम देवरिया में जिला प्रचारक, गोरखपुर विभाग प्रचारक के साथ ही बस्ती विभाग प्रचारक और कानपुर में सह प्रांत प्रचारक का दायित्व निभा चुके हैं। इसके बाद इन्हें शनिवार को कानपुर का प्रांत प्रचारक का दायित्व सौंपा गया।
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श्रीराम स्नातक की शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही बाल अवस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ता के रूप में जाने जाने लगे। उनका कहना है कि लगातार उनकी कर्तव्य परायणता व कार्य के प्रति लगन शीलता से उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कानपुर प्रांत प्रचारक का दायित्व सौंपा गया, जो अपने आप में क्षेत्र के लिए गौरव का विषय विषय है।

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जैसे इस बात की जानकारी उनके गांव और उनकी मूल शाखा के लोगों की हुई उनमें खुशी की लहर दौड़ पड़ी। बलिया और मिर्जापुर जिले में प्रचारक का दायित्व निभा चुके दुर्गा प्रसाद ने बताया कि श्रीराम की लगन, शीलता और कार्य के प्रति गंभीरता ने उन्हें भीड़ से भी अलग रखा। उन्होंने बताया कि जखनिया कस्बे में शिव मंदिर पर लगने वाली महावीर प्रभात शाखा के स्वयंसेवक रहे श्रीराम का इस दायित्व पर पहुंचना शाखा के लिए गर्व की बात है।

घोर विपत्ति भीसंकल्प से डिगा नहीं पाई
बचपन से ही अपने संकल्प के प्रति दृढ़ संकल्पित श्रीराम का पूरा परिवार सिद्धपीठ हथियाराम मठ का परंपरागत शिष्य रहा है। 1990 के दशक से संघ के प्रति समर्पित हुए श्रीराम के सामने 2005 में उस समय उनके सामने बड़ा संकट आ गया, जब उनके बड़े भाई व तत्कालीन गाजीपुर भाजपा किसान मोर्चा जिला मंत्री सभाजीत सिंह की मंदिर में पूजा करते वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भी वह शाखा से जुड़े रहे।

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