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घरौनी करेगा सपना साकार, 60 हजार घरों को मिलेगा कागज पर आकार
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गांवों में आबादी की जमीन पर स्वामित्व के लिए शुरू की गई घरौनी योजना अब वाराणसी में साकार होने लगी है। नए साल में 132 गांवों के 65 हजार घरों का स्वामित्व प्रमाणपत्र जारी करने की तैयारी है। इसके अलावा 1020 गांवों का ड्रोन सर्वे पूरा कर लिया गया है और अब यहां के 745 गावों के लाखों घरों का मानचित्र पड़ताल के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग को भेज दिया गया है।
स्वामित्व योजना के तहत जिले के 132 गांवों के करीब 60 हजार लोगों को आबादी की जमीन का जल्द घरौनी प्रमाणपत्र दिया जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश में केवल पांच जिलों में स्वामित्व योजना की शुरुआत की गयी थी। इसमें सेवापुरी ब्लॉक के करीब 40 से अधिक गांवों में प्रमाणपत्र बांटा जा चुका है। योजना के तहत आबादी की जमीन का ड्रोन सर्वे किया गया है। ड्रोन सर्वे की जिम्मेदारी शासन से निजी कंपनी को दी गयी है। सर्वे के बाद लेखपाल अपने ग्रामसभा के नक्शा से सत्यापन कर डिटेल रिपोर्ट राजस्व विभाग को मुहैया कराता है। इसके बाद आबादी का मालिकाना हक निर्धारित कर खतौनी नंबर जारी किया जाएगा। हालांकि शुरू में केवल आदर्श ब्लॉक सेवापुरी में यह योजना प्रस्तावित थी। इसके बाद सभी आठों ब्लॉकों में शुरू किया गया है। बनारस में 200 गांवों को स्वामित्व योजना के तहत करीब 87 हजार लोगों को घरौनी का प्रमाणपत्र वितरित किया जाना है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में स्वामित्व योजना लागू कर दी गयी है। इससे वाराणसी में पूर्व में जारी सर्वे का कार्य प्रभावित हुआ है।
घरौनी पर मिल सकेगा लोन
गांवों की कृषि भूमि, ग्रामसभा, बंजर आदि भूमि का रिकार्ड तो रेवन्यू विभाग के पास होता है। कृषि भूमि का मालिकाना हक दिखाने के लिए खसरा खतौनी बनाई जाती है, लेकिन आबादी में बने घरों का मालिकाना हक के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं होता। इससे तमाम परेशानियां सामने आती हैं। घरों का बंटवारा होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं होता है। इससे अदालती मुकदमे बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा गांवों के घरों की यूनिक आईडी नहीं होती। मालिकाना हक नहीं होने से घरों को बैंकों में मॉर्गेज पर नहीं रखा जा सकता है। इस योजना के तहत मालिकाना हक मिलने के बाद खतौनी की तर्ज पर घरौनी बनेगी। इसके आधार पर ग्रामीण बैंकों से लोन प्राप्त कर सकेंगे। अभी मकान के कागज न होने के कारण बैंक ग्रामीणों को उनके मकान के आधार पर पर लोन नहीं देते थे।
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एक नजर में
तहसील सर्वे वाले गांव
सदर 294
पिंडरा 358
राजातालाब 370
घरौनी के लिए ड्रोन सर्वे का काम एक हजार से ज्यादा गांवों में पूरा कर लिया गया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अनुमोदन के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। - रणविजय सिंह, अपर जिलाधिकारी, प्रशासन
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स्वामित्व योजना के तहत जिले के 132 गांवों के करीब 60 हजार लोगों को आबादी की जमीन का जल्द घरौनी प्रमाणपत्र दिया जाएगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश में केवल पांच जिलों में स्वामित्व योजना की शुरुआत की गयी थी। इसमें सेवापुरी ब्लॉक के करीब 40 से अधिक गांवों में प्रमाणपत्र बांटा जा चुका है। योजना के तहत आबादी की जमीन का ड्रोन सर्वे किया गया है। ड्रोन सर्वे की जिम्मेदारी शासन से निजी कंपनी को दी गयी है। सर्वे के बाद लेखपाल अपने ग्रामसभा के नक्शा से सत्यापन कर डिटेल रिपोर्ट राजस्व विभाग को मुहैया कराता है। इसके बाद आबादी का मालिकाना हक निर्धारित कर खतौनी नंबर जारी किया जाएगा। हालांकि शुरू में केवल आदर्श ब्लॉक सेवापुरी में यह योजना प्रस्तावित थी। इसके बाद सभी आठों ब्लॉकों में शुरू किया गया है। बनारस में 200 गांवों को स्वामित्व योजना के तहत करीब 87 हजार लोगों को घरौनी का प्रमाणपत्र वितरित किया जाना है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में स्वामित्व योजना लागू कर दी गयी है। इससे वाराणसी में पूर्व में जारी सर्वे का कार्य प्रभावित हुआ है।
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घरौनी पर मिल सकेगा लोन
गांवों की कृषि भूमि, ग्रामसभा, बंजर आदि भूमि का रिकार्ड तो रेवन्यू विभाग के पास होता है। कृषि भूमि का मालिकाना हक दिखाने के लिए खसरा खतौनी बनाई जाती है, लेकिन आबादी में बने घरों का मालिकाना हक के लिए कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं होता। इससे तमाम परेशानियां सामने आती हैं। घरों का बंटवारा होने के बाद भी विवाद समाप्त नहीं होता है। इससे अदालती मुकदमे बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा गांवों के घरों की यूनिक आईडी नहीं होती। मालिकाना हक नहीं होने से घरों को बैंकों में मॉर्गेज पर नहीं रखा जा सकता है। इस योजना के तहत मालिकाना हक मिलने के बाद खतौनी की तर्ज पर घरौनी बनेगी। इसके आधार पर ग्रामीण बैंकों से लोन प्राप्त कर सकेंगे। अभी मकान के कागज न होने के कारण बैंक ग्रामीणों को उनके मकान के आधार पर पर लोन नहीं देते थे।
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तहसील सर्वे वाले गांव
सदर 294
पिंडरा 358
राजातालाब 370
घरौनी के लिए ड्रोन सर्वे का काम एक हजार से ज्यादा गांवों में पूरा कर लिया गया है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अनुमोदन के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। - रणविजय सिंह, अपर जिलाधिकारी, प्रशासन