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दावा : इंडोनेशिया और भारत का जेनेटिक संबंध 70 हजार साल पुराना, 20-30 फीसदी DNA हिंदुस्तानी; जानें खास

Tue, 28 Jan 2025 09:48 AM IST
अमन विश्वकर्मा हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 28 Jan 2025 09:48 AM IST
सार

बीएचयू और एस्टोनिया के वैज्ञानिकों के रिसर्च में कई चाैंकाने वाले तथ्य सामने आए। इससे यह साबित हो रहा है कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध हजारों साल पुराने हैं। बीएचयू के जीन वैज्ञानिक ने इस पर अपनी बात रखी है।

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genetic relationship Indonesia and India is 70 thousand years old 20-30 percent of DNA is Indian
बीएचयू और एस्टोनिया के वैज्ञानिकों का रिसर्च। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

India and Indonesia : इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोओ सुबियांतो का ये दावा सही है कि उनमें भारत का डीएनए है। बीएचयू और एस्टोनिया के वैज्ञानिकों का रिसर्च कहता है कि इंडोनेशिया की सभी 27 करोड़ आबादी में भारत का ही डीएनए है। हर एक इंडोनेशियाई में डीएनए का कम से कम 20-30 फीसदी हिस्सा भारतीय ही है।

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देश के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोओ सुबियांतो बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। 26 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से दिए गए भोज के दौरान उन्होंने कहा कि उनके पास इंडियन डीएनए है। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जोर से हंस पड़े। इसके बाद वह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।
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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के इस दावे को बीएचयू का रिसर्च साबित करता है। बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि 70 हजार साल पहले से लेकर 1700 पूर्व तक भारत और इंडोनेशिया का जेनेटिक संबंध रहा है। इस दौरान भारत के कई राजा इंडोनेशिया गए हुए थे। 

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जल्द ही होगा चाैथा रिसर्च
इंडोनेशियाई लोगों का डीएनए वर्तमान में अंडमान-निकोबार के आदिवासियों और सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों में भी मिला है। प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे और एस्टोनिया के तार्तू विवि के वैज्ञानिकों ने इन संबंधों के अध्ययन के लिए कुल तीन शोध किए हैं। ये रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर के साइंटिफिक रिपोर्ट, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन और ह्यूमन बायोलॉजी में प्रकाशित हो चुके हैं। जल्द ही चौथा रिसर्च पेपर प्रकाशित होने वाला है।



जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे का कहना है कि राष्ट्रपति प्राबोओ सुबियांतो के ऐसा कहने की तीन वजहें हो सकती हैं। पहला उनका वाई क्रोमोसोम भारत का हो सकता है। 

दूसरा उनका माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए भारतीय हो सकता है और तीसरा उनका 30 फीसदी डीएनए भारत का हो सकता है। प्रो. चौबे ने कहा कि इसमें वाई क्रोमोसोम का अर्थ है कि उनका पैतृक डीएनए भारत का होगा। मातृत्व वाला डीएनए भारत का होगा। ऑटोसोम डीएनए 30 प्रतिशत के आसपास होगा।

genetic relationship Indonesia and India is 70 thousand years old 20-30 percent of DNA is Indian
बीएचयू में हुआ रिसर्च। - फोटो : अमर उजाला

अफ्रीका से भारत के रास्ते इंडोनेशिया पहुंचे थे आदि मानव
बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि अंडमान द्वीप के जारवा, ओंगे और ग्रेट अंडमानी आदिवासियों का एम-31 और एम-32 डीएनए, निकोबार का आर-22, वहीं सिंधु घाटी सभ्यता का यू-टू-बी डीएनए इंडोनेशिया की सौ फीसदी आबादी के डीएनए में लगभग 30 फीसदी तक पाया गया है। 

70 हजार साल पहले अफ्रीका से निकले आदि मानव भारत और इंडोनेशिया के रास्ते ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। काफी वर्षों तक भारत में रहे। इसलिए इंडोनेशिया और भारत के लोगों में एक माइटोक्रॉन्ड्रियल संबंध बना हुआ है। 

वहीं, भारत से ऑस्ट्रेलिया के बीच ये लोग अंडमान के रास्ते गए थे। अंडमान के जारवा, ओंगे और ग्रेट अंडमानिज आदिवासियों को इंडोनेशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ पूरे चीन की आबादी का जीवित पूर्वज कहा जाता है।

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