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27 साल बाद मंच पर चढीं चित्रा तो दिल में उमड़ा दर्द, आखों में उतरे आंसू,नहीं लगाए सुर
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 16 Apr 2017 05:07 PM IST
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बोलीं- जिंदा रही तो अगले साल संकट मोचन के दरबार में सुरों से लगाऊंगी हाजिरी
- फोटो : अमर उजाला
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मशहूर गजल गायिका चित्रा सिंह शनिवार की रात जग विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह के मंच पर माइक थामने के बाद भी सुर नहीं लगा सकीं। एक तरफ साज और दूसरी ओर चाहने वालों की खचाखच उमड़ी भीड़ ।
तमाम कोशिशों के बाद भी मंच को नमन कर बिन सुर लगाए उतर गईं। चाहने वालों की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। चित्रा ने कांपते होठों से बस इतना ही कहा कि अब बोल नहीं पाती। जिंदा रही तो अगले साल इसी मंच से गाऊंगी।
रात करीब 10:15 बजे चित्रा सिंह मंच पर पहुंची। उनके साथ दिल्ली के ख्याल गायक डॉ. विश्वनाथ भी थे। संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने उनको स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। चित्रा ने माइक तो संभाला लेकिन सुर लगाने के इरादे से नहीं।
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उन्होंने कहा कि माइक से रिश्ता टूट चुका है। अब तो ठीक से बोल भी नहीं पाती। गा नहीं सकूंगी। बहुत कुरेदने के बाद भी उन्होंने माइक लौटा दिया। संकट मोचन के महंत ने प्रेरित भी किया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी की कृपा होगी तो वह जरूर गाएंगी।
इस पर भी उनके दिल में दर्द का छाया मंजर नहीं छंटा। उनकी आंखों से आंसू आ गए। वह मंच से नीचे उतर आईं। पत्रकारों से सवालों का भी उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। काफी कुरेदने के बाद बोलीं कि हो सकता है कि अब दोबारा न आ सकूं।
अगर जिंदा रहीं तो अगले वर्ष इसी मंच से सुर लगाने का प्रयास करूंगी।
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तमाम कोशिशों के बाद भी मंच को नमन कर बिन सुर लगाए उतर गईं। चाहने वालों की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। चित्रा ने कांपते होठों से बस इतना ही कहा कि अब बोल नहीं पाती। जिंदा रही तो अगले साल इसी मंच से गाऊंगी।
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रात करीब 10:15 बजे चित्रा सिंह मंच पर पहुंची। उनके साथ दिल्ली के ख्याल गायक डॉ. विश्वनाथ भी थे। संकट मोचन के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने उनको स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। चित्रा ने माइक तो संभाला लेकिन सुर लगाने के इरादे से नहीं।
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उन्होंने कहा कि माइक से रिश्ता टूट चुका है। अब तो ठीक से बोल भी नहीं पाती। गा नहीं सकूंगी। बहुत कुरेदने के बाद भी उन्होंने माइक लौटा दिया। संकट मोचन के महंत ने प्रेरित भी किया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी की कृपा होगी तो वह जरूर गाएंगी।
इस पर भी उनके दिल में दर्द का छाया मंजर नहीं छंटा। उनकी आंखों से आंसू आ गए। वह मंच से नीचे उतर आईं। पत्रकारों से सवालों का भी उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। काफी कुरेदने के बाद बोलीं कि हो सकता है कि अब दोबारा न आ सकूं।
अगर जिंदा रहीं तो अगले वर्ष इसी मंच से सुर लगाने का प्रयास करूंगी।