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काशी में खारा हुआ गंगा जल
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2015 01:13 AM IST
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वाराणसी। अविरलता-निर्मलता के लिए दो हजार करोड़ रुपये की लागत वाली नमामि गंगे परियोजना तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काशी में गंगा का जल खारा हो गया है।
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पीएच की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक हो जाने से गंगा जल में क्षारीयता बढ़ गई है। यह खुलासा हुआ है हाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराए गए परीक्षण से। यही हाल रहा तो श्रद्धालुओं और पर्यटकों से भरी रहने वाली इस तीर्थ नगरी में गंगा का जल पीने योग्य नहीं रह जाएगा। कहा जा रहा है कि अगर नालों को गंगा में बहने से नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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सामने घाट से राजघाट के बीच हाल में ही गंगा जल के 20 नमूनों की जांच कराई गई। रिपोर्ट में पीएच सामान्य स्तर से काफी बढ़ा हुआ पाया गया। पीएच की मात्रा जहां सात होनी चाहिए, वहीं यह सामने घाट, दशाश्वमेध घाट और राजघाट के पास 8.69 मिली। इससे जल में क्षारीयता बढ़ गई है।
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हालांकि डीओ (डिजाल्व आक्सीजन) 8.7 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है जो संतोषजनक है लेकिन बीओडी (बायो आक्सीजन डिमांड) डाउन स्टीम में राजघाट के पास 5.1 मिली ग्राम पर लीटर पाया गया है। यह आंकड़ा सामान्य स्तर पर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से दो मिलीग्राम प्रति लीटर अधिक हो गया है।
बीएचयू की गंगा प्रयोगशाला के पूर्व समन्वयक प्रो. यूके चौधरी के मुताबिक क्षारीयता की मात्रा जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे गंगा का जल पीने से पेट और त्वचा संबंधी बीमारियां जन्म ले सकती हैं। 33 से अधिक नाले गंगा में गिर रहे हैं। इनमें चार बड़े नालों से शहर की सघन आबादी के अलावा उद्योगों का गंदा पानी बहकर गंगा में जा रहा है। नालों को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है।