गंगा का जलस्तर स्थिर लेकिन दुश्वारियां बरकरार, वरुणा पार के लोग अभी भी घर छोड़ने को मजबूर
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सबसे अधिक परेशानी वरुणा पार के क्षेत्र में हो रही है, जहां लोग अभी भी वरुणा के बढ़ाव से जूझ रहे हैं। वरुणा के कहर से लोग घर खाली करने को मजबूर हो गए हैं। जलस्तर से नक्खी घाट, दनियालपुर, शैलपुत्री, कोनिया समेत तटवर्ती इलाके में रहने वाले लोग दहशत में हैं। वरुणा का पानी कोनिया से लेकर चौका घाट के बीच तटवर्ती इलाकों में पूरी तरह से फैल गया है।
इससे क्षेत्र के हजारों घरों को वरुणा जलमग्न कर चुकी है। अभी भी लोग अपना मकान खाली करके अपने रिश्तेदारों के यहां जा रहे हैं। जिनके मकान दो या तीन मंजिला है वह अपने मकान के ऊपरी मंजिल पर जैसे तैसे परिवार के साथ गुजारा कर रहे हैं। प्रशासन के लोग नक्खी घाट बाढ़ चौकी क्षेत्र के नक्खीघाट, शैलपुत्री, कोनिया इलाके में नाव से लगातार गश्त की जा रही है और जलभराव से फंसे लोगों को निकाल कर बाहर लाया जा रहा है।
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शिविर का नहीं है अता पता :
जल भराव के चार दिन बीत जाने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों के लिए बाढ़ सहायता शिविर का क्षेत्र में कहीं भी अता पता नहीं है। अपना मकान छोड़कर जाने वाले लोग या तो अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे हैं या फिर किराए का कमरा लेकर रह रहे हैं। सुविधा के नाम पर कुछ भी व्यवस्था नहीं की गई है।
पांच घंटे वेटिंग पर हुआ शवदाह :
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पांच घंटे से अधिक समय प्रतिक्षा के बाद शवदाह हो सका। मणिकर्णिका घाट निवासी विभूति नारायण सिंह ने बताया कि काशी के आस पास के सभी शवदाह स्थल बंद हो गये हैं। मंगलवार की रात्रि में अचानक बड़ी संख्या में शव लेकर लोग पहुंच गए। इससे वहां भीड़ लग गई। करीब पांच घंटे तक प्रतिक्षा करने के बाद शवों को जलाया जा सका। हालांकि सुबह होते होते स्थिति सामान्य हो गई।
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सुबह पांच बजे से स्थिर है जलस्तर :
केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर सुबह पांच बजे 69.97 था। इसके बाद से गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया, जो देर रात तक रहा। हालांकि हथिनि बैराज से छोड़े गए पानी का असर करीब 48 घंटे बाद काशी में दिखेगा। तब तक आयोग का मानना है कि गंगा का बहाव आगे की होर हो जाएगा।