पूर्वांचल में घटने लगा गंगा का जलस्तर, लेकिन तटीय इलाकों में रहने वालों की बढ़ने लगीं दुश्वारियां
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पूर्वांचल में गंगा का जलस्तर घटने लगा है, बावजूद इसके लोगों को अभी राहत नहीं मिल पा रही हैं। इसकी मुख्य वजह यह कि अब भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इस वजह से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को अभी भी घरों में ही कैद रहना पड़ रहा है। इस बीच लंबे समय से एक ही जगह पानी के जमा होने और उसमें दुर्गंध की वजह से बीमारियां फैलने की आशंका बनी है।
गंगा के साथ ही वरुणा में पानी अधिक होने का असर है कि यहां कई घरों में पानी भर गया है। लोग सामानों को सुरक्षित स्थानों पर रखे हैं। उधर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के साथ ही जिले के ग्रामीण इलाकों में तो कुछ इंटर कॉलेजों में भी पानी भरने की वजह से राहत शिविर भी दूर ही बनाना प्रशासन की मजबूरी है। गंगा में खतरे का निशान 71.26 मीटर है जबकि मंगलवार को 71.69 मीटर पानी दर्ज किया गया।
हालांकि बनारस के आसपास के जिलों में भी पानी कम होने लगा है। इसलिए लोग थोड़ी राहत तो महसूस कर रहे हैं लेकिन जैसे-जैसे पानी कम होता जा रहा है, दुश्वारियां उतनी ही बढ़ती जा रही है। उधर जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों में क्लोरीन की गोली के साथ ही जरूरी दवाइयां बांटने के साथ ही लोगों को साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के प्रति जागरूक किया।
नदियों का जलस्तर घटने से राहत :
गाजीपुर जिले में गंगा सहित सहायक नदियों का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है। ऐसे में जहां संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। अब कई संगठन बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीडितों को राहत सामाग्री बांटने पहुंच रहे हैं।
गंगा में घटाव जारी, बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें बरकरार
बलिया जिले में गंगा के जलस्तर में घटाव बना हुआ है लेकिन बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। गांव के छोड़कर लोग बंधे या सड़कों पर डेरा डालकर रहने को विवश हैं। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार मंगलवार की सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 59.920 मी. दर्ज किया गया था। साथ ही आधा सेमी का घटाव बना हुआ है। उधर, बाढ़ पीड़ितों की मदद को विभिन्न संगठनों ने हाथ बढ़ाना शुरु कर दिया है।

मिर्जापुर जिले में गंगा का पानी अब घटाव पर है। सोमवार को तकरीबन दो फीट तक जलस्तर में कमी आई। जानकारों का कहना है कि अब बाढ़ का पानी तेजी से घटेगा। लेकिन इसी के साथ तटवर्ती इलाकों में कटान तेज हो जाएगी। साथ ही प्रभावित इलाकों में संक्रमण के साथ ही पशुओं के लिए चारा पानी की दिक्कत होगी। हालांकि प्रशासन ने कई इलाकों में रसद-पताई पहुंचाने की व्यवस्था की है। इससे राहत है।
शनिवार को गंगा का जलस्तर स्थिर था। रविवार की भोर से पानी घटना शुरू हुआ। जिले में गंगा का अधिकतम जलस्तर 77. 990 मीटर रिकार्ड किया गया था। सोमवार को शाम सात बजे गंगा का जलस्तर 77. 440 मीटर रिकार्ड किया गया। जिले में खतरे का बिंदु 77. 724 मीटर निर्धारित है।