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मां गंगा को मई तक झेलना पड़ेगा सीवर का दंश
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वाराणसी। लापरवाही के चलते काशी में मां गंगा को अभी मई 2020 तक सीवर का दंश झेलना पड़ेगा। क्योंकि रमना में बन रहे एसटीपी के निर्माण में बैंक और निर्माण कंपनी में विवाद के चलते विलंब होगा। इससे अस्सी नदी का गंदा पानी भी गंगा में ही गिरेगा। इसके अलावा भी नमामि गंगे की कुछ और योजनाएं हैं, जो अभी भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही हैं।
अस्सी नदी से प्रतिदिन गंगा नदी में 50 एमएलडी से अधिक सीवर गिरता है। इसके अलावा शहर का लगभग एक चौर्थाई सीवर का पानी विभिन्न नालों से होते हुए अस्सी में मिलता है। इस गंदे पानी से पतित पावनी को बचाने के लिए गंगा प्रदूषण विभाग की ओर से रमना में 102 करोड़ की लागत से एक एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है, जिसे नवंबर 19 में पूरा हो जाना है, लेकिन अब वह छह माह विलंब से पूरा हो पाएगा। ऐसे में प्रतिदिन 50 एमएलडी सीवर रोज गंगा में बिना शोधन के ही गिराया जाएगा।
ये है वजह
नमामि गंगे परियोजना के तहत रमना में एसटीपी निर्माण कार्य शुरू हुआ। पीपीपी मोड पर बनने वाले इस प्लांट को बनाने का जिम्मा एसएल कंपनी ने लिया। इसमें 40 करोड़ 80 लाख रुपये नमामि गंगे को और बाकी का पैसा कंपनी को लगाना था। कंपनी ने यश बैंक से लोन लिया, लेकिन बैंक और कंपनी के कुछ विवाद के चलते पेमेंट रुक गया है। इससे पूरा काम प्रभावित हो गया है। इस विलंब के चलते करीब छह माह और विलंब होगा।
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पूरी क्षमता से नहीं काम कर रहीं ये परियोजनाएं
नमामि गंगे की ओर से 118 करोड़ रुपये खर्च करके बनाई गई 120 एमएलडी गोइठहां एसटीपी बनकर तैयार हो गई। प्रधानमंत्री ने उसका उद्घाटन कर दिया, लेकिन आज भी मात्र 25 प्रतिशत ही सीवर का शोधन हो रहा है। इसकी वजह यह है कि अभी प्लांट तक सीवर ही नहीं पहुंच रहा है। इससे उस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि यह योजना शुरू हो जाए तो वरुणा पार का पूरा सीवर उसमें शोधन हो सकता है।
वर्तमान में चल रहे प्लांट
1- 9.8 एमएलडी क्षमता का भगवानपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
2- 80 एमएलडी का दीनापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
3- 12 एमएलडी का डीएलडब्लू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
4- 170 करोड़ से 140 एमएलडी दीपापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
5- 118 करोड़ से 120 एमएलडी गोईठहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
ये है निर्माणाधीन प्लांट
1- 153 करोड़ से 50 एमएलडी रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
बैंक और कंपनी के बीच कुछ विवाद के चलते यह योजना अटक गई है। समय से कार्य पूरा न करने पर नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही कंपनी पर जुुर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी।
-एसके राय, जीएम गंगा प्रदूषण नियंत्रण ईकाई
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अस्सी नदी से प्रतिदिन गंगा नदी में 50 एमएलडी से अधिक सीवर गिरता है। इसके अलावा शहर का लगभग एक चौर्थाई सीवर का पानी विभिन्न नालों से होते हुए अस्सी में मिलता है। इस गंदे पानी से पतित पावनी को बचाने के लिए गंगा प्रदूषण विभाग की ओर से रमना में 102 करोड़ की लागत से एक एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है, जिसे नवंबर 19 में पूरा हो जाना है, लेकिन अब वह छह माह विलंब से पूरा हो पाएगा। ऐसे में प्रतिदिन 50 एमएलडी सीवर रोज गंगा में बिना शोधन के ही गिराया जाएगा।
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ये है वजह
नमामि गंगे परियोजना के तहत रमना में एसटीपी निर्माण कार्य शुरू हुआ। पीपीपी मोड पर बनने वाले इस प्लांट को बनाने का जिम्मा एसएल कंपनी ने लिया। इसमें 40 करोड़ 80 लाख रुपये नमामि गंगे को और बाकी का पैसा कंपनी को लगाना था। कंपनी ने यश बैंक से लोन लिया, लेकिन बैंक और कंपनी के कुछ विवाद के चलते पेमेंट रुक गया है। इससे पूरा काम प्रभावित हो गया है। इस विलंब के चलते करीब छह माह और विलंब होगा।
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पूरी क्षमता से नहीं काम कर रहीं ये परियोजनाएं
नमामि गंगे की ओर से 118 करोड़ रुपये खर्च करके बनाई गई 120 एमएलडी गोइठहां एसटीपी बनकर तैयार हो गई। प्रधानमंत्री ने उसका उद्घाटन कर दिया, लेकिन आज भी मात्र 25 प्रतिशत ही सीवर का शोधन हो रहा है। इसकी वजह यह है कि अभी प्लांट तक सीवर ही नहीं पहुंच रहा है। इससे उस योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। जबकि यह योजना शुरू हो जाए तो वरुणा पार का पूरा सीवर उसमें शोधन हो सकता है।
वर्तमान में चल रहे प्लांट
1- 9.8 एमएलडी क्षमता का भगवानपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
2- 80 एमएलडी का दीनापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
3- 12 एमएलडी का डीएलडब्लू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
4- 170 करोड़ से 140 एमएलडी दीपापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
5- 118 करोड़ से 120 एमएलडी गोईठहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
ये है निर्माणाधीन प्लांट
1- 153 करोड़ से 50 एमएलडी रमना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
बैंक और कंपनी के बीच कुछ विवाद के चलते यह योजना अटक गई है। समय से कार्य पूरा न करने पर नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही कंपनी पर जुुर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी।
-एसके राय, जीएम गंगा प्रदूषण नियंत्रण ईकाई