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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Ganga river moved 300 meters away from Assi Ghat in varanasi sand area increased and water level reached 57 me

चिंता: अस्सी घाट से 300 मीटर दूर हुईं गंगा, रेती का दायरा 12 किमी तक बढ़ा, जून में जलस्तर पहुंचा 57 मीटर

Sun, 09 Jun 2024 09:38 AM IST
अमन विश्वकर्मा आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 09 Jun 2024 09:38 AM IST
सार

Varanasi News: महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र के चेयरमैन और गंगा विशेषज्ञ प्रो. बीडी त्रिपाठी का कहना है कि गंगा में बालू के टीले पहले जून में नजर आते थे। लेकिन, गंगा का घाटों को छोड़ना पहली बार हुआ है। यह हम सभी के लिए चेतावनी है। अगर समय रहते इस पर विचार नहीं किया गया तो गंगा बेसिन में रहने वाली 45 करोड़ की आबादी को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है।

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Ganga river moved 300 meters away from Assi Ghat in varanasi sand area increased and water level reached 57 me
अस्सी घाट पर उभरा रेत का टीला। - फोटो : संवाद

विस्तार

रेत के टीले उभरने के साथ ही गंगा अब अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक सीढि़यों से दूर हो गई हैं। अस्सी घाट से गंगा की दूरी 300 मीटर हो चुकी है। इसी तरह गंगा पार रेती का दायरा भी बढ़कर 12 किलोमीटर हो गया है। जून में गंगा का जलस्तर 57.78 मीटर तक पहुंचने और गंगा के प्राकृतिक स्वभाव में आए बदलाव से नदी विज्ञानी भी चिंतित हैं।

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गंगा के जलस्तर में हर साल 0.5 से 38.1 सेंटीमीटर की कमी आ रही है। जून में हर दिन 0.05 सेंटीमीटर जलस्तर गिर रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार पांच जून को गंगा का जलस्तर 57.90 मीटर, छह जून को 57.88, सात जून को 57.83 और आठ जून को 57.78 मीटर दर्ज किया गया। 
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इसी वजह से जलकल को पानी भी कम मिल रहा है। इसकी भरपाई ट्यूबवेल से की जा रही है। रेत पहले रामनगर किले के सामने जमा होती थी, लेकिन गंगा के प्रवाह में आए बदलाव के कारण अब पश्चिम के बजाय पूरब में रेत शिफ्ट होने लगी है।
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आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर और गंगा लैब के प्रभारी रहे प्रो. यूके चौधरी ने बताया कि गंगा की प्रकृति में तेजी से बदलाव हो रहा है। सात से आठ मीटर तक बालू सतह से सात मीटर अंदर तक आ गया है। इससे गंगा का प्रवाह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। रामनगर किला के बगल में गंगा की गहराई 10 से 12 मीटर बढ़ गई है। 

गंगा पार बालू क्षेत्र की लंबाई सात से बढ़कर अब 12 किलोमीटर हो चुकी है। बालू क्षेत्र का विस्तार तो राजघाट पुल को पार कर चुका है। घाट की तरफ नगवा में तीन किलोमीटर में 10 से 15 मीटर का कटान हुआ है। गंगा रक्षेश्वर महादेव घाट पर बने नार्वे एंबेसी से मिले प्रोजेक्ट सरफेस वाटर से ग्राउंड वाटर डि्रकिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर गंगा के पेट में समा गया है। गंगा दशाश्वमेध घाट तक घाटों से दूर हो चुकी है। 

दशाश्वमेध घाट के बाद जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, वैसे वैसे गंगा की गहराई भी बढ़ती जा रही है। यह खतरनाक है। भूजल का रिसाव भी तेज होने से शहर के भीतर जगह-जगह पर धसान की समस्या तेज होती गई।

उपाय

  • गंगा के इको सिस्टम के बारे में सोचना होगा
  • केवल प्रदूषण के बारे में बात करने से नहीं होगा सुधार
  • गंगा में पानी का प्रवाह बढ़ाना होगा - गंगा के प्रोजेक्ट्स को रोजगारपरक बनाना होगा
  • गंगा बेसिन में भूजल का अतिदोहन रोकना होगा

डायनमिक फ्लो प्रभावित होने के कारण बढ़ रही है रेत
आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र का कहना है कि गंगा के स्वभाव में बदलाव हम सभी के लिए चिंता का कारण है। यह कोई आकस्मिक घटना नहीं है बल्कि चल रही सतत प्रक्रिया के नकारात्मक परिणाम हैं। गंगा डायनमिक फ्लो प्रभावित होने के कारण घाटों और बीच गंगा में रेत बढ़ रही है। 

गंगा में पानी का प्रवाह कम होने से प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ेगी। असि नदी का स्थान बदलने के कारण अस्सी घाट पर रेत का पहाड़ सा बन चुका है। पानी का फ्लो बढ़ जाएगा तो बालू के टीले खुद ही बह जाएंगे और उनका वजूद खत्म हो जाएगा।

बढ़ गई काई, बदल गया पानी का रंग
गंगा में पानी का स्तर कम होने के कारण नील हरित शैवाल उगने लगे हैं और कई घाटों पर काई जम गई है। इस कारण पानी के रंग में भी बदलाव नजर आ रहा है। यही हाल रहा तो गंगाजल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा घटेगी। बायोलाॅजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ेगी। इससे जलीय जंतुओं का जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा।
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