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व्यावसायिक लाभ के लिए हो रही गंगा से छेड़छाड़
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संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि गंगा का वाणिज्यिक लाभ उठाने के उद्देश्य से छेड़छाड़ की जा रही है। इससे निकट भविष्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न होगी। वह रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर तुलसीघाट पर संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
प्रो. मिश्र ने कहा कि गंगा तट के ललिता घाट पर गंगा के अंदर एक लंबे प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है, जिसके कारण गंगा का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके दुष्परिणाम भी दिख रहे हैं। ललिता घाट के अपस्ट्रीम में शैवाल के पनपने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है। गंगा जी में प्रचुर मात्रा में शैवाल का पाया जाना जल एवं गंगा के उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। इस प्लेटफार्म की वजह से घाटों की तरफ सिल्ट का जमाव बढ़ेगा एवं गंगा घाट से दूर हो जाएंगी। गंगा जी के पूर्वी तट पर एक नहर का निर्माण भी किया जा रहा है एवं कहा जा रहा है कि इस कारण से गंगा जी के पश्चिमी तट पर पड़ने वाले जल दबाव में कमी आएगी एवं घाटों के नीचे हो रहे जल रिसाव में कमी आएगी, हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य मालवाहक जल पोतों के आवागमन को सुचारू रूप प्रदान करना है। आज जो भी हो रहा है वह प्रौद्योगिकी के विरुद्ध है इसके दुष्परिणाम अवश्य सामने आएंगे और इन कार्यों का अस्तित्व लंबे समय तक नहीं रहेगा।
वेबिनार में काशी कथा के डॉ. अवधेश दीक्षित ने बताया कि मनमाने ढंग से योजनाएं लागू की जा रही हैं पारदर्शिता का अभाव है कोई भी अधिकारी सही जवाब नहीं दे रहा है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. जितेंद्र पांडेय ने कहा कि गंगा के लचीलेपन को समाप्त कर दिया गया तो इकोसिस्टम को संभालना मुश्किल हो जाएगा। वेबिनार में समाजसेवी रामयश मिश्र, अशोक पांडेय, नरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. एसएन उपाध्याय, राजेश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रो. मिश्र ने कहा कि गंगा तट के ललिता घाट पर गंगा के अंदर एक लंबे प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है, जिसके कारण गंगा का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके दुष्परिणाम भी दिख रहे हैं। ललिता घाट के अपस्ट्रीम में शैवाल के पनपने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है। गंगा जी में प्रचुर मात्रा में शैवाल का पाया जाना जल एवं गंगा के उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। इस प्लेटफार्म की वजह से घाटों की तरफ सिल्ट का जमाव बढ़ेगा एवं गंगा घाट से दूर हो जाएंगी। गंगा जी के पूर्वी तट पर एक नहर का निर्माण भी किया जा रहा है एवं कहा जा रहा है कि इस कारण से गंगा जी के पश्चिमी तट पर पड़ने वाले जल दबाव में कमी आएगी एवं घाटों के नीचे हो रहे जल रिसाव में कमी आएगी, हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य मालवाहक जल पोतों के आवागमन को सुचारू रूप प्रदान करना है। आज जो भी हो रहा है वह प्रौद्योगिकी के विरुद्ध है इसके दुष्परिणाम अवश्य सामने आएंगे और इन कार्यों का अस्तित्व लंबे समय तक नहीं रहेगा।
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वेबिनार में काशी कथा के डॉ. अवधेश दीक्षित ने बताया कि मनमाने ढंग से योजनाएं लागू की जा रही हैं पारदर्शिता का अभाव है कोई भी अधिकारी सही जवाब नहीं दे रहा है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. जितेंद्र पांडेय ने कहा कि गंगा के लचीलेपन को समाप्त कर दिया गया तो इकोसिस्टम को संभालना मुश्किल हो जाएगा। वेबिनार में समाजसेवी रामयश मिश्र, अशोक पांडेय, नरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. एसएन उपाध्याय, राजेश मिश्र आदि मौजूद रहे।
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