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आकाशदीप से रोशन होगी शहीदों की राह
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आश्विन पूर्णिमा से शहीदों की राह आकाशदीप के झिलमिलाते दीयों से रोशन हो जाएगी। अश्विन पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक जलने वाले यह आकाशदीप गंगा के तट पर शहीद पुलिस और पीएसी के जवानों के सम्मान में जलाए जाते हैं। कार्तिक मास पर्यंत यह आकाशदीप शहीद जवानों की याद में रोशन रहते हैं।
वहीं, नेमियों की ओर से भी अपने पुरखों की याद में आकाशदीप रोशन किए जाते हैं। गंगोत्री सेवा समिति के अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे ने बताया कि धर्म की नगरी काशी परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है। आश्विन पूर्णिमा पर 20 अक्तूबर को शाम 4:45 बजे से गंगोत्री सेवा समिति की ओर से शहीद जवानों की याद में और उनकी आत्मिक शांति के निमित्त आकाशदीप जलाए जाएंगे। यह आकाशदीप कार्तिक मास पर्यंत जलते रहेंगे। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि 21 अक्तूबर की शाम को दशाश्वमेध घाट पर आकाशदीप जलाए जाएंगे।
कार्तिक मास में है दीपदान का विधान
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि कार्तिक मास भर दीपदान करने का विधान है। कार्तिक में तुलसी आराधना की महिमा विशेष है। कार्तिक मास में तुलसी-आरोपण का विशेष महत्व है। भगवती तुलसी विष्णुप्रिया कहलाती हैं। हरि संकीर्तन कार्तिक मास का मुख्य कृत्य है। कार्तिक मास का महात्म्य पद्मपुराण तथा स्कंदपुराण में विस्तार से उपलब्ध है। पुराणों के मतानुसार इस मास को चारों पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है।
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वहीं, नेमियों की ओर से भी अपने पुरखों की याद में आकाशदीप रोशन किए जाते हैं। गंगोत्री सेवा समिति के अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे ने बताया कि धर्म की नगरी काशी परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है। आश्विन पूर्णिमा पर 20 अक्तूबर को शाम 4:45 बजे से गंगोत्री सेवा समिति की ओर से शहीद जवानों की याद में और उनकी आत्मिक शांति के निमित्त आकाशदीप जलाए जाएंगे। यह आकाशदीप कार्तिक मास पर्यंत जलते रहेंगे। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि 21 अक्तूबर की शाम को दशाश्वमेध घाट पर आकाशदीप जलाए जाएंगे।
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कार्तिक मास में है दीपदान का विधान
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि कार्तिक मास भर दीपदान करने का विधान है। कार्तिक में तुलसी आराधना की महिमा विशेष है। कार्तिक मास में तुलसी-आरोपण का विशेष महत्व है। भगवती तुलसी विष्णुप्रिया कहलाती हैं। हरि संकीर्तन कार्तिक मास का मुख्य कृत्य है। कार्तिक मास का महात्म्य पद्मपुराण तथा स्कंदपुराण में विस्तार से उपलब्ध है। पुराणों के मतानुसार इस मास को चारों पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला माना गया है।
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