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गंगा में बह रहा कारखानों का अवजल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 13 Jul 2016 01:57 AM IST
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काशी और आसपास के इलाकों के कारखानों का उत्सर्जित अवजल सीधे गंगा में बहाया जा रहा है। अकेले वाराणसी और रामनगर औद्योगिक आस्थान को मिलाकर 25 लाख लीटर औद्योगिक कचरा गंगा में बहाया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों ने इलोक्ट्रोप्लेटिंग के 19 कारखानों को बंद कराने की रिपोर्ट जरूर भेजी है लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागज पर की गई है। कारखाने धड़ल्ले से चलाए जा रहे हैं।
गंगा में कारखानों का बिना शोधित अवजल धड़ल्ले से बहाया जा रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण इकाई पर इसकी मॉनीटरिंग करने और नियमों का पालन न करने पर इनका संचालन बंद कराने की जिम्मेदारी है लेकिन यह विभाग सिर्फ खानापूर्ति करने में जुटा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने औद्योगिक क्षेत्र के किसी भी प्लांट को शून्य उत्प्रवाह निस्तारण व्यवस्था किए बिना न संचालित कराने का निर्देश दिया है लेकिन अभी तक वाराणसी और रामनगर के किसी भी कारखाने में यह व्यवस्था लागू नहीं कराई जा सकी है ।
सूबे में कुल 1396 कारखाने चिह्नित किए गए हैं, जिनका अवजल गंगा में बहाया जा रहा है, इसमें 106 कारखानों वाराणसी क्षेत्र में स्थित हैं। अकेले बनारस में 50 से अधिक साड़ी फैक्ट्रियों से रासायनिक अवजल गंगा में बहाया जा रहा है। इसके अलावा इलेक्ट्रोप्लेटिंग के दो सौ से अधिक कारखाने चलाए जा रहे हैं। हालांकि कार्रवाई के नाम पर बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को भी एसटीपी लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
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गंगा में कारखानों का बिना शोधित अवजल धड़ल्ले से बहाया जा रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण इकाई पर इसकी मॉनीटरिंग करने और नियमों का पालन न करने पर इनका संचालन बंद कराने की जिम्मेदारी है लेकिन यह विभाग सिर्फ खानापूर्ति करने में जुटा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने औद्योगिक क्षेत्र के किसी भी प्लांट को शून्य उत्प्रवाह निस्तारण व्यवस्था किए बिना न संचालित कराने का निर्देश दिया है लेकिन अभी तक वाराणसी और रामनगर के किसी भी कारखाने में यह व्यवस्था लागू नहीं कराई जा सकी है ।
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सूबे में कुल 1396 कारखाने चिह्नित किए गए हैं, जिनका अवजल गंगा में बहाया जा रहा है, इसमें 106 कारखानों वाराणसी क्षेत्र में स्थित हैं। अकेले बनारस में 50 से अधिक साड़ी फैक्ट्रियों से रासायनिक अवजल गंगा में बहाया जा रहा है। इसके अलावा इलेक्ट्रोप्लेटिंग के दो सौ से अधिक कारखाने चलाए जा रहे हैं। हालांकि कार्रवाई के नाम पर बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को भी एसटीपी लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
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