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गंगा में ठप है नौका संचालन, नाविकों के सामने रोजी-रोटी का संकट

Sun, 09 May 2021 01:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 01:10 AM IST
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ganga boat at varanasi
कोरोना के कारण एक तरफ अस्पतालों में जहां मरीज बदहाल हैं वहीं शहर के कई वर्गों की हालत भी खराब होने लगी है। तीर्थ पुरोहितों के अलावा काशी का नाविक समाज की माली हालत दिन ब दिन खराब होने लगी है। नाविकों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के हालात बने रहे तो उनके सामने भीख मांगने तक की नौबत आ सकती है।
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अस्सी से लेकर राजघाट के बीच कोरोना कर्फ्यू के कारण नौकायन ठप है। सुबह और शाम पर्यटकों से गुलजार रहने वाले गंगा घाटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। कमाई के सीजन में ही कोरोना की मार से नौका संचालन करने वालों की जीविका पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। कोरोना कर्फ्यू अगर और लंबा खींचा तो स्थिति बद से बदतर हो सकती है। अप्रैल, मई और जून के महीने में ही नाविक समाज की कमाई होती है। इसके बाद फिर बाढ़ की शुरुआत होने लगती है और नौकायन बंद हो जाता है।
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कोरोना संक्रमण के कारण पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन नहीं होने से नाविकों का जीवनयापन कठिन होता जा रहा है। पिछले साल 80 दिन के लॉकडाउन के कारण नाविक समाज की हालत पिछले साल से ही बदहाल चल रही है। नौकायन समिति के अध्यक्ष शंभू नाथ साहनी ने बताया कि 20 दिनों से कोरोना कर्फ्यू के कारण नौका संचालन पूरी तरह से ठप चल रहा है। नाविक समाज के सामने धीरे-धीरे अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने लगा है। हमने समाज के मंत्री, नेताओं और शासन से भी इस मामले में सपंर्क किया है लेकिन अभी तक किसी भी तरह की मदद नहीं मिली है। पिछली बार सोनू सूद तथा कुछ स्थानीय सामाजिक संस्थाओं की मदद से नाविक समाज को थोड़ी राहत मिली थी।
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एक लाख 20 हजार की आबादी पर संकट
शंभू ने बताया कि अस्सी से राजघाट के बीच लगभग एक लाख 20 हजार मल्लाह समाज की आबादी बसती है। गंगा में वर्तमान में छोटी और बड़ी मिलाकर 15 सौ नावों का संचालन किया जाता है। सत्यनारायण साहनी, प्रमोद माझी और सोनू साहनी ने बताया कि नौका संचालन से जीविका चलाने वालों का तो हाल सबसे ज्यादा बेहाल है।
नाविकों को बेचने पड़े थे गहने
कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान हुए 80 दिन के लॉकडाउन में नाविकों की कमर टूट गई थी। हालत इतनी खराब हो गई थी कि नाविकों की पत्नियों को अपने गहने और जेवर बेचने पड़े थे। कईयों ने तो अपनी गहने गिरवी भी रखे थे।

गंगा उस पार भी पसरा है सन्नाटा
कोरोना कर्फ्यू के कारण कुछ ऐसा ही हाल गंगा उस पार की नावों का भी है। रामनगर और डोमरी इलाके के नाविकों की रोजी-रोटी नहीं चल रही है। इससे मल्लाह समाज के लोग बेरोजगार हो गए हैं। नाव चलाकर जो कमाई होती थी उसी से परिवार का पालन-पोषण होता था। बाहरी पर्यटकों के नहीं आने से कमाई ठप है।
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