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विघ्नहर्ता को काढ़ा और कोरोनिल का चढ़ावा

Mon, 24 Aug 2020 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 12:24 AM IST
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वाराणसी। कोरोना संक्रमण के कारण पंडालों की भव्यता नहीं है। कहीं प्रतीक स्वरूप पूजन हो रहा है तो कहीं मंदिरों में। कहीं पार्थिव गणेश विराजे हैं तो कहीं हल्दी के। सार्वजनिक आयोजन रद्द होने के कारण इस बार घर-घर गजानन विराजे हैं। बाल स्वरूप में विराजने के कारण घरों में गणपति बप्पा का खास ख्याल रखा जा रहा है। कहीं उनको कोरोनिल चढ़ाया जा रहा है तो कहीं प्रसाद स्वरूप काढ़ा चढ़ाया जा रहा है।
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रविवार को काशी में कोरोना से मुक्ति के लिए गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना की गई। भजन कीर्तन के साथ विघ्नहर्ता की आराधना हुई। श्री काशी गणेश उत्सव समिति की ओर से भगवान गणेश का प्रतीकात्मक पूजन हुआ। लोकमान्य सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति की ओर से भगवान गणेश का पूजन हुआ। उत्सव मंत्री वैभव दीक्षित ने बाल गणेश को कोरोना से बचाव के लिए इम्युनिटी बूस्टर किट भी अर्पित की गई। श्री गणेशोत्सव सेवा समिति के ऑनलाइन श्रीगणेशोत्सव में शरदबुआ घाघ का प्रवचन हुआ। उनके साथ प्रभाकर पुजारी ने तबले और अवधूत पुजारी ने तानपूरे पर साथ दिया। इसके पश्चात राकेश तिवारी ने भजन प्रस्तुत किया। शाम को शतरंज प्रतियोगिता हुई। नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल ने वेदमूर्ति रामचंद्र श्रीकृष्ण देव, प्रो. विंध्येश्वरी प्रसाद मिश्र, नरेंद्र आचार्य को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. राजाराम शुक्ल और मुख्य अतिथि डॉ. शंकर कुमार मिश्र रहे। धनंजय दातार, पांडुरंग पुराणिक और माधव जनार्दन रटाटे ने संयोजन किया।
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धूम-धाम से मनाया गया गणेशोत्सव
सिगरा विद्यापीठ स्थित अन्नपूर्णा इन्क्लवे कालोनी में अजय सिंह के आवास पर गणेशोत्सव धूम-धाम से मनाया जा रहा है। भजन-संध्या का भव्य आयोजन शाम को मुंबई से आए प्रख्यात गायक प्रेम प्रकाश दुबे व अन्य कलाकारों ने किया। इस दौरान भाजपा नेता महेशचंद्र श्रीवास्तव, हंसराज विश्वकर्मा, पुनीत वर्मन, अमृता बर्मन, मनोज सिंह, नीलमणि पांडेय मौजूद रहे।
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मूंगा रत्न निर्मित गणेश मंदिर पर ताला, टूटी परंपरा
कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर पर लटक रहा ताला
वाराणसी। कोरोना संक्रमण के कारण मूंगा रत्न निर्मित गणेश मंदिर पर ताला लटक रहा है। श्रद्धालुओं से भरे रहने वाले मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा हुआ है। मंदिर के पुजारी आशीष पंडित सुबह शाम गणेश जी का पूजन-अर्चन भोग लगाकर परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। पहला मौका है जब इस बार पेशवाओं के बनाए गणेश मंदिर में गणेशोत्सव नहीं मनाया जा रहा है। मंदिर में श्रद्धालु बाहर से प्रथमेश के दर्शन कर लौट रहे हैं।

काशी के चौरासी प्रमुख घाटों में एक घाट है गणेश घाट। अठ्ठारहवीं सदी के पूर्वाद्रर्ध में पुणे के अमृतराव पेशवा ने तब कच्चे और अग्निश्वर और रामघाट के एक हिस्से का पक्का निर्माण कराया और इसे नई पहचान दी। घाट पर ही गणेश जी का प्रचीन मंदिर स्थापित होने की वजह से ही कालांतर में घाट का नाम गणेश घाट ही पड़ गया। वाराणसी के अलावा महाराष्ट्र के लोगों की आस्था भी इस घाट और गणेश मंदिर के प्रति काफी है। अमृतराव 1800 के आसपास वाराणसी चले आए थे। पेशवाओं के लिए यह एकमात्र धार्मिक महत्व वाले गणेश घाट स्थित इस मंदिर में पेशवाओं की तरफ से हर वर्ष पारंपरिक रूप से गणेशोत्सव मनाया जाता रहा है। काशी में गणेश के 67 पीठ है। इसमें 11 गणेश पीठ और 56 विनायक पीठ है। महाराष्ट्र के बाद काशी ही है जहां पूरे उत्साह के साथ गणेशोत्सव मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार कोरोना ने इस परंपरा को भी तोड़ दिया है।
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