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चंपारण से काशी पहुंची 'गांधी सद्भावना यात्रा', जगह- जगह स्वागत

Tue, 20 Mar 2018 09:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 20 Mar 2018 09:28 PM IST
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Gandhi sadbhavna yatra reach kashi from champaran
काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में आयोजित हुआ कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के संदेशों को लेकर बिहार के चंपारण से निकली गांधी सद्भावना यात्रा मंगलवार को काशी पहुंची। इसका जगह-जगह स्वागत किया गया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में पहुंचने पर सदस्यों को फूल माला पहनाकर और ‘वैष्णों जन तो तेने कहिए’ गीत के साथ स्वागत किया गया।
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इस दौरान राष्ट्रपिता के व्यक्तित्व, कृतित्व पर आधारित नाटक और संगोष्ठी का आयोजन किया गया।  डॉ. विजय नारायण सिंह ने कहा कि गांधी जी के विचारों को लोगों ने भुला दिया है। जागृति राही ने गांधीयन मूवमेंट पर प्रकाश डाला। डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि गांधी एक ब्रांड हो गए हैं जिसके नाम पर अपनी दुकान चमकाई जा रही है।
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चित्रा सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि महिलाओं के जिस सशक्तिकरण की बात गांधी जी करते थे वह आज भी अधूरा है। अध्यक्षीय संबोधन डॉ. योगेंद्र शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग रहे। महात्मा गांधी और कायदे आजम जिन्ना के बीच काल्पनिक संवाद का मंचन किया गया।
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इसमें यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के भविष्य को लेकर जो सपने उन्होंने देखे थे आज यह दोनों देश उससे बिल्कुल अलग हैं। इस पर वह अफसोस भी जताते हैं। डॉ. गोपाल कृष्ण गांधी के लेख पर आधारित नाटक‘दर्द-ए-दिल’ को सभी ने सराहा।

डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी ने कहा कि जरूरत है महात्मा गांधी को अपने आचार, विचार में जीवित रखने की। इस दौरान श्रीलंका से आए कलाकारों ने वहां की संस्कृति को प्रदर्शित करती दो नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की।


यात्रा दल के नेता अनिल ने बताया कि गांधी के विचारों को आत्मसात करते हुए निकली यात्रा को जगह-जगह उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि चंपारण में आज भी किसान आत्महत्या कर रहे हैं।  
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