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पेट्रोल 17 रुपये सस्ता मगर किराया जस का तस
अमर उजाला ब्यूरो,वाराणसी
Updated Wed, 04 Feb 2015 01:56 AM IST
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एक साल के भीतर पेट्रोल की कीमत में 17 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है मगर आॅटो का किराया एक धेला भी कम नहीं हुआ। ऐसा तब हुआ है जब परिवहन प्राधिकरण की बैठक में किराया कम किए जाने का फैसला हो चुका है। जब पेट्रोल 80 रुपये लीटर था तो उस समय कैंट से मैदागिन का किराया 12 रुपया था।
आज पेट्रोल 63 रुपये के आसपास है और भाड़ा आज भी 12 रुपये ही है। बीते 21 जनवरी को आॅटो यूनियन ने किराए में दस से लेकर 35 फीसदी की तक की कमी का ऐलान किया था मगर आॅटो वाले आज भी पुराना किराया ही सवारियों से वसूल रहे हैं। आॅटो चालकों की मनमानी का आलम यह है कि वे बेधड़क तीन की जगह पांच सवारी बिठा रहे हैं और सभी से बराबरी का किराया वसूल रहे हैं। जानकारी के बाद भी परिवहन विभाग खामोश बैठा है।
परिवहन विभाग और आटो चालकों की मिलीभगत का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर में रोजाना किराए को लेकर आटो चालकों और यात्रियों के बीच किचकिच हो रही है। गतिरोध खत्म करने केलिए कोई पहल नहीं की जा रही। जबकि किराया सूची जारी होने के सात दिन के अंदर ही इसे अमल में लाने को कहा गया था। परिवहन विभाग ने मनमाना किराया ले रहे एक भी आटो के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। पूछने पर अधिकारी गोलमटोल जवाब देते हैं।
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तेल के दाम में कटौती के मद्देनजर परिवहन विभाग ने 21 जनवरी को आटो यूनियन के अध्यक्ष दीनानाथ सिंह दीनू के साथ बैठक कर दस से 35 फीसदी तक किराया कम करने का आदेश जारी किया था। शहरी क्षेत्र के लिए नई किराया सूची भी जारी की गई थी। साथ ही आटो में तीन सवारी बैठाने का निर्देश भी दिया था। मगर अगले ही दिन आटो चालकों ने इसका विरोध कर दिया। आटो चालकों ने प्रशासन को दो टूक कहा कि यदि उन्हें पांच सवारी बैठाने की अनुमति मिले तभी वह किराया कम करेंगे। परिवहन विभाग के आदेश का असर एक भी दिन देखने को नहीं मिला।
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आज पेट्रोल 63 रुपये के आसपास है और भाड़ा आज भी 12 रुपये ही है। बीते 21 जनवरी को आॅटो यूनियन ने किराए में दस से लेकर 35 फीसदी की तक की कमी का ऐलान किया था मगर आॅटो वाले आज भी पुराना किराया ही सवारियों से वसूल रहे हैं। आॅटो चालकों की मनमानी का आलम यह है कि वे बेधड़क तीन की जगह पांच सवारी बिठा रहे हैं और सभी से बराबरी का किराया वसूल रहे हैं। जानकारी के बाद भी परिवहन विभाग खामोश बैठा है।
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परिवहन विभाग और आटो चालकों की मिलीभगत का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। शहर में रोजाना किराए को लेकर आटो चालकों और यात्रियों के बीच किचकिच हो रही है। गतिरोध खत्म करने केलिए कोई पहल नहीं की जा रही। जबकि किराया सूची जारी होने के सात दिन के अंदर ही इसे अमल में लाने को कहा गया था। परिवहन विभाग ने मनमाना किराया ले रहे एक भी आटो के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। पूछने पर अधिकारी गोलमटोल जवाब देते हैं।
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तेल के दाम में कटौती के मद्देनजर परिवहन विभाग ने 21 जनवरी को आटो यूनियन के अध्यक्ष दीनानाथ सिंह दीनू के साथ बैठक कर दस से 35 फीसदी तक किराया कम करने का आदेश जारी किया था। शहरी क्षेत्र के लिए नई किराया सूची भी जारी की गई थी। साथ ही आटो में तीन सवारी बैठाने का निर्देश भी दिया था। मगर अगले ही दिन आटो चालकों ने इसका विरोध कर दिया। आटो चालकों ने प्रशासन को दो टूक कहा कि यदि उन्हें पांच सवारी बैठाने की अनुमति मिले तभी वह किराया कम करेंगे। परिवहन विभाग के आदेश का असर एक भी दिन देखने को नहीं मिला।