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दिल की नजरों से करेंगे काबा का दीदार

Sun, 23 Aug 2015 02:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 23 Aug 2015 02:36 AM IST
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From the eyes of heart will the Ka Didar
जौनपुर के अबू बकर दिल की नजरों से काबा का दीदार करेंगे। उन्हें अल्लाह की उस पाक सरजमीं पर जाने की खुशी, खुली आंखों से गुंबद-ए-खिजरा का दीदार न कर पाने के दुख से कहीं ज्यादा है। बचपन से ही नाबीना (दृष्टिहीन) अबू बकर अकेले ही शनिवार को सफर-ए-हज पर रवाना हुए। यूं तो उनके परिवार का कोई शख्स उनके साथ नहीं था लेकिन उनके पड़ोस के बदरुद्दीन व उनकी पत्नी कमरुन निसां उनके साथ थे, उन्हें सहारा देने के लिए।
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चौकाघाट सांस्कृतिक संकुल स्थित हज हाउस से शनिवार को 250 हजयात्रियों का पांचवां जत्था मदीने के लिए रवाना हुआ। इसमें सर्वाधिक हजयात्री जौनपुर और इलाहाबाद के रहे। इसमें इलाहाबाद के रिटायर्ड चपरासी मोहम्मद इस्लाम अकेले ही पाई-पाई जोड़कर हज पर गए। उनकी बड़ी तमन्ना थी बीवी को हज कराने की लेकिन
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कैंसर का ऑपरेशन कराने के बाद उनकी बीवी समीरुन निसां हमेशा के लिए बिस्तर पर चली गई हैं। उन्होंने करीब तीन साल तक उनके सही होने का इंतजार किया लेकिन जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तब अकेले ही हज पर जाने का फैसला लिया। इसी पांचवें जत्थे में दो दोस्त अब्दुल अजीज और मोहम्मद शाहिद भी सफर-ए-हज पर साथ साथ रवाना हुए।
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